नीम से टपकता ‘रहस्य’ : आस्था, कौतूहल और विज्ञान के बीच डुमरी गांव
सिमरी प्रखंड का डुमरी गांव इन दिनों किसी मेले जैसा दिख रहा है। वजह न कोई उत्सव है, न ही कोई बड़ा आयोजन—बल्कि मंदिर परिसर में खड़ा एक साधारण-सा नीम का पेड़, जिससे लगातार टपक रहा है दूध जैसा सफेद तरल। यही दृश्य गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों के लोगों को भी अपनी ओर खींच रहा है। कोई इसे चमत्कार मान रहा है, तो कोई प्रकृति की रहस्यमयी लीला।
--दूधिया तरल को ग्रामीण मान रहे चमत्कार, वैज्ञानिक बता रहे पेड़ का प्राकृतिक बचाव तंत्र
केटी न्यूज/डुमरांव
सिमरी प्रखंड का डुमरी गांव इन दिनों किसी मेले जैसा दिख रहा है। वजह न कोई उत्सव है, न ही कोई बड़ा आयोजन—बल्कि मंदिर परिसर में खड़ा एक साधारण-सा नीम का पेड़, जिससे लगातार टपक रहा है दूध जैसा सफेद तरल। यही दृश्य गांव ही नहीं, आसपास के इलाकों के लोगों को भी अपनी ओर खींच रहा है। कोई इसे चमत्कार मान रहा है, तो कोई प्रकृति की रहस्यमयी लीला।सुबह से शाम तक पेड़ के नीचे लोगों की भीड़ लगी रहती है। महिलाएं पूजा की थालियां लेकर पहुंच रही हैं, बच्चे उत्सुक निगाहों से टपकती बूंदों को देख रहे हैं और बुजुर्ग इसे किसी दैवीय संकेत से जोड़कर चर्चा कर रहे हैं।

तरल को गिलास, बोतल और कटोरियों में सहेजा जा रहा है। गांव में मान्यता फैल गई है कि यह “महारानी की कृपा” है और इससे सुख-समृद्धि आएगी।स्थानीय ज्योतिषी शिव विलास पांडेय का दावा है कि पेड़ से प्रतिदिन 10 से 15 लीटर तक तरल गिर रहा है और पिछले दस दिनों में करीब 160 लीटर से अधिक इकट्ठा किया जा चुका है। उनके अनुसार, यह सामान्य घटना नहीं, बल्कि किसी विशेष संकेत की ओर इशारा करती है। इसी मान्यता के चलते मंदिर परिसर में भीड़ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।लेकिन आस्था की इस भीड़ के समानांतर विज्ञान भी अपनी ठोस व्याख्या पेश कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नीम जैसे पेड़ों से निकलने वाला यह सफेद तरल ‘लेटेक्स’ या दूधी रस हो सकता है।

छाल में दरार, कीटों का हमला, या मौसम में अचानक बदलाव के कारण पेड़ के अंदर दबाव बढ़ता है और वह यह रस बाहर छोड़ता है। यह पेड़ का प्राकृतिक रक्षा तंत्र है, जो उसे बीमारियों और कीटों से बचाता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि मौसम में नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण ऐसी घटनाएं कभी-कभार सामने आती हैं। हालांकि, वैज्ञानिक तर्कों के बावजूद गांव में आस्था का पलड़ा भारी दिख रहा है। डुमरी का यह नीम का पेड़ अब सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि विश्वास और विज्ञान के बीच खड़ा वह सवाल बन चुका है—जिसका उत्तर हर कोई अपने नजरिए से दे रहा है।

