बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मिला बल

जिले के ग्राम पंचायत चुरामंनपुर में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ विषय पर एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद की।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मिला बल

__ चुरामंनपुर में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीणों ने लिया कुप्रथा खत्म करने का संकल्प

केटी न्यूज/बक्सर

जिले के ग्राम पंचायत चुरामंनपुर में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ विषय पर एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद की।कार्यक्रम में डालसा की सचिव नेहा दयाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कम उम्र में विवाह से विशेषकर बालिकाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है, शिक्षा बाधित होती है और उनके उज्ज्वल भविष्य पर विराम लग जाता है।इस अवसर पर बक्सर औद्योगिक थाना प्रभारी सुरेश कुमार सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि इस अपराध में शामिल अभिभावकों एवं सहयोगियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सामाजिक दबाव में आकर कोई ऐसा कदम न उठाएं, जो कानून और समाज दोनों के खिलाफ हो।

कार्यक्रम में पैरालीगल वॉलंटियर्स। रामजी यादव, प्रमोद कुमार, शत्रुधन सिन्हा, शालिनी कुमारी, अजीता कुमारी, रुकैया, राम राज सिंह, मंजू कुमारी, ब्रजेश कुमार तथा मनन सिंह—ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर जागरूकता फैलाने और संदिग्ध मामलों की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया।ग्रामीणों को बताया गया कि किसी भी बाल विवाह की सूचना तुरंत प्रशासन, डालसा कार्यालय या टोल-फ्री नंबर 15100 पर दी जा सकती है। साथ ही जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे अपने गांव को बाल विवाह मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए एकजुट रहेंगे। जागरूकता और सहभागिता से भरा यह आयोजन सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।