जेपी आंदोलन की आवाज थम गई, नहीं रहे डुमरांव के मदन केशरी “जिगर”
डुमरांव की सामाजिक और वैचारिक दुनिया का एक जाना-पहचाना चेहरा गुरुवार की अहले सुबह हमेशा के लिए खामोश हो गया। जेपी आंदोलन के सक्रिय सेनानी, साहित्य और रंगमंच के प्रेमी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय तक जुड़े रहे मदन केशरी “जिगर” का 68 वर्ष की उम्र में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही डुमरांव सहित पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।


-- साहित्य, समाजसेवा और वैचारिक प्रतिबद्धता से बनाई अलग पहचान, डुमरांव में शोक की लहर
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव की सामाजिक और वैचारिक दुनिया का एक जाना-पहचाना चेहरा गुरुवार की अहले सुबह हमेशा के लिए खामोश हो गया। जेपी आंदोलन के सक्रिय सेनानी, साहित्य और रंगमंच के प्रेमी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय तक जुड़े रहे मदन केशरी “जिगर” का 68 वर्ष की उम्र में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही डुमरांव सहित पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई।मदन केशरी “जिगर” उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने अपने जीवन को केवल व्यक्तिगत दायरे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक सरोकारों और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 1977 के छात्र आंदोलन और जेपी आंदोलन के दौर में उन्होंने युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके करीबी बताते हैं कि वे स्पष्ट विचारों और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, जिनकी पहचान हर वर्ग में सम्मानित चेहरे के रूप में थी।उनका पारिवारिक इतिहास भी देशभक्ति और संघर्ष से जुड़ा रहा। उनके पिता स्वर्गीय बिहारी लाल केशरी स्वतंत्रता आंदोलन के सिपाही रहे, जबकि माता स्वर्गीय पार्वती देवी धार्मिक और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ी गृहिणी थीं। छह भाइयों में दूसरे स्थान पर रहे मदन केशरी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए सामाजिक जीवन में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

उन्होंने अपनी तीनों बेटियों की शादी कर पारिवारिक दायित्वों को भी पूरी निष्ठा से पूरा किया।साहित्य, कविता और नाटक के प्रति उनका विशेष लगाव था। स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। लोग उन्हें केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्यप्रेमी और मिलनसार व्यक्तित्व के तौर पर भी याद करते हैं।उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

जदयू के वरिष्ठ नेता रामबिहारी सिंह, विधायक राहुल सिंह, जदयू जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भुवन, समाजसेवी प्रदीप शरण, शंभू शरण नवीन, पवन श्रीवास्तव, श्यामजी गुप्ता, सुमित कुमार, रेडक्रॉस सचिव शत्रुघ्न गुप्ता, पत्रकार अजय सिंह, अरुण विक्रांत, अनिल ओझा, आलोक सिन्हा, अरविंद कुमार चौबे, रजनीकांत दूबे, अशोक कुमार, अमित ओझा, रंजीत पांडेय, सुजीत कुमार, सुमित पांडेय, विनीत मिश्रा, राजपरिवार के मान विजय सिंह, शिवांग विजय सिंह, समाजसेवी नंदजी सिंह, भाजपा नेता कतवारू सिंह, राजीव रंजन सिंह आदि सहित कई जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, पत्रकारों और गणमान्य लोगों ने इसे डुमरांव की सामाजिक क्षति बताया है।शहर में दिनभर उनके आवास पर लोगों का तांता लगा रहा। हर आंख नम थी और हर जुबान पर बस एक ही बात थी “जिगर” जैसे लोग समाज में बार-बार नहीं जन्म लेते।

