शहनाई की गूंज से सराबोर हुआ डुमरांव, बिस्मिल्लाह खां महोत्सव में सजी सुरों की महफिल
कला, संस्कृति और संगीत की मधुर त्रिवेणी शनिवार को डुमरांव में उस समय देखने को मिली, जब कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में राज प्लस टू उच्च विद्यालय, डुमरांव परिसर में भव्य उस्ताद बिस्मिल्लाह खां महोत्सव का आयोजन किया गया। अपनी मिट्टी के महान सपूत और विश्वविख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ को समर्पित इस महोत्सव ने पूरे इलाके को सुरमयी बना दिया।

— महान शहनाई वादक की जन्मस्थली पर कलाकारों ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, देर रात तक झूमते रहे दर्शक
केटी न्यूज/डुमरांव :
कला, संस्कृति और संगीत की मधुर त्रिवेणी शनिवार को डुमरांव में उस समय देखने को मिली, जब कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में राज प्लस टू उच्च विद्यालय, डुमरांव परिसर में भव्य उस्ताद बिस्मिल्लाह खां महोत्सव का आयोजन किया गया। अपनी मिट्टी के महान सपूत और विश्वविख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ को समर्पित इस महोत्सव ने पूरे इलाके को सुरमयी बना दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ डुमरांव विधायक राहुल कुमार सिंह, जिलाधिकारी साहिला, उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह एवं अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हो गया।इस अवसर पर जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ के जीवन और उनके अद्वितीय योगदान को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा कि डुमरांव की धरती पर जन्मे इस महान कलाकार ने न केवल शहनाई को वैश्विक पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बनारस घराने की शैली में उनके वादन ने संगीत प्रेमियों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और वर्ष 2001 में भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया।महोत्सव का सबसे आकर्षक क्षण तब आया, जब उस्ताद के पुत्र एवं प्रसिद्ध तबला वादक नाजिम हुसैन ने मंच संभाला।

उनकी ताल की थाप पर पूरा परिसर गूंज उठा। दर्शकों ने करतल ध्वनि से उनका भव्य स्वागत किया। अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी प्रस्तुति ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। शहरवासियों के स्नेह और सम्मान से अभिभूत नजर आए नाजिम हुसैन ने भी अपनी खुशी व्यक्त की।कार्यक्रम में युवा साहित्यकार मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्ला खां के जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने साधारण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उनके संस्मरणों ने कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भर दिया।

महोत्सव में स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया गया, जिससे आयोजन और अधिक जीवंत हो उठा। सुमन कुमारी, अमित कुमार, अभिषेक कुमार, ऐश्वर्या कुमारी, शिवपूर्णा पाण्डेय, ओमकार दूबे, ज्योति कुमारी और ब्रजेश चौबे ने अपने गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं मनोज मोहित के नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। शुभम कुमार समूह द्वारा प्रस्तुत समूह गायन ने कार्यक्रम में सामूहिकता और समरसता का भाव जगाया।मुख्य आकर्षण के रूप में सूफी बॉलीवुड गायक राकेश राज शानू ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को और अधिक संगीतमय बना दिया। जयपुर घराने के शबरी ब्रदर्स ने शास्त्रीय संगीत की गहराई का अहसास कराया, वहीं उस्ताद बिस्मिल्ला खां घराना द्वारा प्रस्तुत शहनाई वादन ने जैसे समय को थाम लिया।

शहनाई की मधुर तान सुनकर दर्शक भावविभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय और सुरमयी हो गया।कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त रही। डीसीएलआर टेसलाल, बीडीओ संदीप कुमार पांडे, थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा, सर्किल इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सुमित सहित बड़ी संख्या में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।कुल मिलाकर, यह महोत्सव न केवल उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ को श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना, बल्कि डुमरांव की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊर्जा प्रदान कर गया। सुर, ताल और भावनाओं से सजे इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती, यह सीधे दिलों को जोड़ने का काम करता है।

