एसटी आयोग के चेयरमैन शैलेन्द्र गढ़वाल का बक्सर दौरा, पर्यटन विकास और जनजातीय मामलों पर हुई चर्चा
बक्सर जिला, जिसे “वीरों की भूमि” के रूप में जाना जाता है, आज एक साथ दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है, अपनी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर पर्यटन के नक्शे पर लाने की जरूरत और आदिवासी समुदायों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान। इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन शैलेन्द्र गढ़वाल बक्सर पहुंचे और प्रशासनिक उदासीनता पर खुलकर सवाल उठाए।
-- चौसा की विरासत से आदिवासी अधिकार तक, बक्सर में विकास और न्याय की दोहरी चुनौती
केटी न्यूज/चौसा
बक्सर जिला, जिसे “वीरों की भूमि” के रूप में जाना जाता है, आज एक साथ दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है, अपनी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर पर्यटन के नक्शे पर लाने की जरूरत और आदिवासी समुदायों से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान। इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन शैलेन्द्र गढ़वाल बक्सर पहुंचे और प्रशासनिक उदासीनता पर खुलकर सवाल उठाए।गढ़वाल ने कहा कि बक्सर में कई ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जिनका सही ढंग से विकास नहीं हो पाया है।

विशेष रूप से चौसा का ऐतिहासिक मैदान, जहां 1539 में हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था, आज भी उपेक्षा का शिकार है। कर्मनाशा और गंगा नदी के संगम पर स्थित यह स्थल यदि पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए, तो बक्सर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।दौरे के दौरान आयोग के चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि आदिवासी और अनुसूचित जाति से जुड़े मामलों में फाइलों के सहारे निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि आयोग ने पिछले सात महीनों में कई बार पत्राचार किया, 11 महीनों तक रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन ठोस प्रगति नहीं होने के कारण अब स्वयं क्षेत्र में आकर स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उनका कहना था कि “असल समस्याएं तभी समझ में आती हैं, जब हम गांवों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करते हैं।”उन्होंने यह भी बताया कि बक्सर समाहरणालय में लंबित मामलों को लेकर प्रशासन के साथ बैठक की गई है, जिसमें त्वरित कार्रवाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

आयोग किसी भी स्तर पर मामलों को दबाने या प्रभावित करने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा और जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, उसे लिखित रूप में दर्ज कर समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।आदिवासी समाज में जागरूकता की कमी पर चिंता जताते हुए शैलेन्द्र गढ़वाल ने कहा कि कई क्षेत्रों में लोगों को अपने संवैधानिक अधिकारों और आयोग की भूमिका की जानकारी तक नहीं है। उन्होंने बताया कि 2 जून को पदभार ग्रहण करने के बाद चुनावी प्रक्रिया के कारण कुछ समय तक कार्य प्रभावित रहा, लेकिन अब आयोग सक्रिय रूप से बिहार के आदिवासी इलाकों का दौरा कर रहा है।

गांव-गांव जाकर समस्याएं एकत्र करना और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना आयोग की प्राथमिकता है।उन्होंने भरोसा जताया कि प्रशासनिक सहयोग और जनभागीदारी से बक्सर न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजो पाएगा, बल्कि आदिवासी समाज को भी उनका अधिकार, सम्मान और न्याय मिल सकेगा। इस अवसर पर अनुसूचित जनजातीय सदस्य राजू खरवार, जदयू जिलाध्यक्ष अशोक सिंह, गोंडवाना सभा के रामजीत गोंड़, रामप्रवेश सिंह सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
