साइकिल पर संकल्प, पर्यावरण की पुकार: पेड़ बचाने का संदेश लेकर धीरज का 7 हजार किमी का सफर

जब अधिकतर लोग आराम और सुविधाओं की तलाश में रहते हैं, तब मध्य प्रदेश के हरदा जिले के छोटे से गांव चंदेवा निवासी धीरज कुमार ने सादगी, संकल्प और साइकिल को अपना साथी बनाकर एक असाधारण यात्रा शुरू की। पर्यावरण संरक्षण और ‘पेड़ बचाओ’ का संदेश लेकर निकले धीरज पिछले एक वर्ष से लगातार साइकिल चलाते हुए अब तक 7 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं।

साइकिल पर संकल्प, पर्यावरण की पुकार: पेड़ बचाने का संदेश लेकर धीरज का 7 हजार किमी का सफर

-- मध्य प्रदेश के हरदा से निकले धीरज कुमार साइकिल से कर रहे हैं भारत-नेपाल भ्रमण, ज्योतिर्लिंग, चार धाम और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ा एक ही यात्रा में

केटी न्यूज/डुमरांव

जब अधिकतर लोग आराम और सुविधाओं की तलाश में रहते हैं, तब मध्य प्रदेश के हरदा जिले के छोटे से गांव चंदेवा निवासी धीरज कुमार ने सादगी, संकल्प और साइकिल को अपना साथी बनाकर एक असाधारण यात्रा शुरू की। पर्यावरण संरक्षण और ‘पेड़ बचाओ’ का संदेश लेकर निकले धीरज पिछले एक वर्ष से लगातार साइकिल चलाते हुए अब तक 7 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं।शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे जैसे ही वे पुराना भोजपुर पहुंचे, स्थानीय लोगों की नजर इस साधारण लेकिन प्रेरणादायक यात्री पर ठहर गई। बातचीत में जब लोगों को पता चला कि धीरज अकेले साइकिल से पूरे भारत और नेपाल का भ्रमण कर रहे हैं, तो हर कोई उनके साहस और संकल्प से प्रभावित नजर आया।

-- आस्था की राह पर पर्यावरण का संदेश

धीरज कुमार की यह यात्रा सिर्फ धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है। वे 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा के साथ-साथ समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। रास्ते में जहां भी रुकते हैं, वहां लोगों से पेड़ लगाने, प्रकृति बचाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हैं।धीरज ने बताया कि वे इस समय नेपाल से उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। इससे पहले वे नेपाल के काठमांडू, जनकपुर और पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भी उन्होंने भारतीय संस्कृति और हरित सोच का प्रचार किया।

-- सादगी ही यात्रा की सबसे बड़ी ताकत

इस पूरी यात्रा में न कोई टीम है, न कोई लग्जरी साधन। धीरज जहां शाम होती है, वहां सुरक्षित स्थान देखकर रुक जाते हैं। कभी गांव, कभी जंगल, तो कभी किसी मंदिर परिसर में रात गुजारते हैं। भोजन भी सामान्य और स्थानीय संसाधनों पर आधारित होता है। उनका मानना है कि प्रकृति के करीब रहकर ही प्रकृति को बचाने का संदेश सही मायनों में दिया जा सकता है।

-- अब तक की उपलब्धियां

धीरज अब तक 8 ज्योतिर्लिंग और 3 धामों के दर्शन कर चुके हैं। साथ ही वे भारत के 9 राज्यों की यात्रा पूरी कर चुके हैं। उनका लक्ष्य कुल 14 से 15 हजार किलोमीटर साइकिल चलाने का है। अंतिम धार्मिक यात्रा के रूप में वे केदारनाथ धाम जाएंगे। इसके बाद ईटानगर होते हुए वापस अपने गृह जिला हरदा लौटने की योजना है।

-- युवाओं के लिए प्रेरणा

पुराना भोजपुर में स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों ने धीरज से लंबी बातचीत की और उनके साहस की सराहना की। लोगों का कहना था कि आज के समय में जब पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, ऐसे में धीरज जैसी पहल समाज के लिए मिसाल है।धीरज कुमार की यह साइकिल यात्रा बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो बिना संसाधन के भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनकी यह यात्रा आस्था, आत्मविश्वास और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।