धान अधिप्राप्ति में बक्सर ने पकड़ी रफ्तार, लेकिन लक्ष्य अभी दूर
जिले में धान अधिप्राप्ति की रफ्तार भले ही बीते वर्ष की तुलना में तेज हुई हो, लेकिन निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने की चुनौती अभी भी बरकरार है। इसी कड़ी में मंगलवार को जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में धान अधिप्राप्ति जिला टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिप्राप्ति की प्रगति, किसानों के भुगतान की स्थिति और चावल आपूर्ति (सीएमआर) जैसे अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
-- 56 प्रतिशत अधिप्राप्ति, 90 प्रतिशत भुगतान के बीच जिलाधिकारी साहिला ने सिस्टम को कसने के दिए सख्त निर्देश
केटी न्यूज/बक्सर
जिले में धान अधिप्राप्ति की रफ्तार भले ही बीते वर्ष की तुलना में तेज हुई हो, लेकिन निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने की चुनौती अभी भी बरकरार है। इसी कड़ी में मंगलवार को जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में धान अधिप्राप्ति जिला टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिप्राप्ति की प्रगति, किसानों के भुगतान की स्थिति और चावल आपूर्ति (सीएमआर) जैसे अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

-- अबतक लक्ष्य का सिर्फ 56 प्रतिशत ही हासिल
समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 8503 किसानों से 78,025.75 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की जा चुकी है। यह जिले को मिले कुल लक्ष्य का 56.17 प्रतिशत ही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसानों के भुगतान की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और अब तक 90.55 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जा चुका है।यह स्थिति जहां प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार की ओर इशारा करती है, वहीं यह भी साफ करती है कि अधिप्राप्ति की गति को और तेज करने की जरूरत है, ताकि शेष किसानों को भी समय रहते लाभ मिल सके।

-- सीएमआर आपूर्ति में सुधार, रैंकिंग में उछाल
बैठक में यह भी बताया गया कि समितियों के माध्यम से अब तक 12,615 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को की जा चुकी है। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले अधिप्राप्ति वर्ष की तुलना में इस बार जिला बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।इसी बेहतर प्रदर्शन का नतीजा है कि राज्य स्तर पर बक्सर जिले की रैंकिंग सुधरकर 21वें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि प्रशासन का मानना है कि इस रैंकिंग से संतोष करने के बजाय जिले को शीर्ष पंक्ति में लाने का लक्ष्य तय करना होगा।

-- जिलाधिकारी का कड़ा रुख, ‘रफ्तार और पारदर्शिता दोनों जरूरी’
जिलाधिकारी साहिला ने बैठक के दौरान साफ शब्दों में कहा कि धान अधिप्राप्ति सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह सीधे किसानों के भरोसे और उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर को निर्देश दिया कि अधिप्राप्ति की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त न की जाए।वहीं जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम को सीएमआर के भुगतान में तेजी लाने और एफआरके (फोर्टिफाइड राइस कर्नेल) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।

-- निगरानी पर जोर, गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि धान अधिप्राप्ति की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। इसके लिए क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहकर प्रभावी पर्यवेक्षण और अनुश्रवण करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर अनियमितता या किसानों की शिकायत सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
-- बैठक में मौजूद रहे अधिकारी, जिम्मेदारी तय
इस अहम बैठक में वरीय उप समाहर्ता (अधिप्राप्ति), जिला सहकारिता पदाधिकारी, जिला प्रबंधक राज्य खाद्य निगम सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के माध्यम से न सिर्फ प्रगति की समीक्षा हुई, बल्कि आगामी दिनों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना और जिम्मेदारियां भी तय की गईं।कुल मिलाकर, बक्सर जिले ने धान अधिप्राप्ति में सुधार के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन लक्ष्य की आधी दूरी पार करना ही काफी नहीं है। अब प्रशासन के सामने असली परीक्षा बाकी लक्ष्य को समय पर पूरा करने और हर किसान तक बिना बाधा लाभ पहुंचाने की है।
