डाटा से तय होगी खेती की दिशा, डुमरांव में कृषि सांख्यिकी को लेकर बड़ा मंथन
खेती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सटीक आंकड़ों के सहारे नीतियों और योजनाओं की रीढ़ बन चुकी है। इसी सोच को मजबूती देने के लिए डुमरांव प्रखंड सभागार में कृषि वर्ष 2025-26 के तहत रबी मौसम को लेकर एक दिवसीय आवृतिधर्या प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में डुमरांव अनुमंडल के सभी प्रखंडों के कृषि सांख्यिकी से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया।
-- रबी मौसम के लिए अधिकारियों-कर्मियों को मिला “ग्राउंड से गवर्नेंस” का मंत्र, ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से सटीक आंकड़ों पर जोर
केटी न्यूज/डुमरांव
खेती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सटीक आंकड़ों के सहारे नीतियों और योजनाओं की रीढ़ बन चुकी है। इसी सोच को मजबूती देने के लिए डुमरांव प्रखंड सभागार में कृषि वर्ष 2025-26 के तहत रबी मौसम को लेकर एक दिवसीय आवृतिधर्या प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में डुमरांव अनुमंडल के सभी प्रखंडों के कृषि सांख्यिकी से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मियों ने भाग लिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी संदीप कुमार पाण्डेय ने की। इससे पहले जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मोती कुमार दिनकर ने पुष्पगुच्छ भेंट कर बीडीओ का स्वागत किया।

डुमरांव, ब्रह्मपुर, नावानगर, चक्की और चौगाई के अंचल अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर प्रशिक्षण का विधिवत शुभारंभ हुआ।कार्यशाला का फोकस साफ था “गलत आंकड़े, गलत योजना” की सोच को बदलना। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृषि सांख्यिकी के आंकड़े केवल कागजों के लिए नहीं, बल्कि किसानों की क्षतिपूर्ति, फसल बीमा, आपदा राहत और भविष्य की कृषि नीति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राजस्व कर्मचारियों और अंचल अधिकारियों को समयबद्ध व शुद्ध प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए।

खास बात यह रही कि 7वीं लघु सिंचाई गणना को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया। चौगाई, डुमरांव प्रखंड और नगर परिषद डुमरांव क्षेत्र में चल रहे गणना, स्क्रूटनी और वैलिडेशन कार्य को 31 जनवरी 2026 तक शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया।प्रशिक्षण सत्र में सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी हेमंत कुमार चौबे (इटाढ़ी) ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ फसल क्षेत्र सर्वेक्षण, खेसरा पंजी संधारण, भूमि उपयोग विवरणी, शुद्ध सिंचित क्षेत्र, फसल कटनी प्रयोग और नेत्रांकन विधि जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया।

डिजिटल इंडिया की झलक भी प्रशिक्षण में दिखी। ई-स्टेटिक्स पोर्टल, सीसीई एग्री ऐप और डीजीसीईएस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन डेटा एंट्री और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया बताई गई, ताकि आंकड़े तेजी से और बिना त्रुटि के सरकार तक पहुंच सकें।इस अनुमंडल स्तरीय कार्यशाला में सहायक एवं प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, राजस्व कर्मचारी, किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक सहित अन्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी रही। कुल मिलाकर यह प्रशिक्षण खेती को आंकड़ों के दम पर मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ।
