मासूम की चीख पर अदालत सख्त: दुष्कर्मी को उम्रकैद
बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जिला अपर सत्र न्यायाधीश-6 सह विशेष पॉक्सो न्यायाधीश अजीत कुमार शर्मा की अदालत ने सोमवार को आरोपी छोटू कुमार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास का आदेश दिया।
--पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, __ 50 हजार जुर्माना, पीड़िता को 10 लाख प्रतिकर देने का आदेश
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जिला अपर सत्र न्यायाधीश-6 सह विशेष पॉक्सो न्यायाधीश अजीत कुमार शर्मा की अदालत ने सोमवार को आरोपी छोटू कुमार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास का आदेश दिया।अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है तो दोषी को एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

इसके अलावा आरोपी को एक अन्य धारा में सात वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और गवाहों के बयान को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने पीड़िता के बयान को मामले की सबसे मजबूत कड़ी मानते हुए उसी आधार पर दोषसिद्धि दर्ज की।यह सनसनीखेज वारदात 22 सितंबर 2023 को सिकरौल थाना क्षेत्र में हुई थी। जानकारी के अनुसार पीड़िता स्कूल से घर लौट रही थी, तभी रास्ते में भदार गांव निवासी छोटू कुमार ने उसे रोककर अपराध को अंजाम दिया। काफी देर बाद बच्ची रोते-बिलखते घर पहुंची।

उसके कपड़े मिट्टी से सने थे और वह बेहद डरी-सहमी हालत में थी। बच्ची ने परिजनों को पूरी घटना बताई, जिसके बाद परिवार ने तत्काल सिकरौल थाना पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज कराई।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता को हुए मानसिक, सामाजिक और शारीरिक आघात को गंभीर माना। इसी आधार पर न्यायालय ने राज्य सरकार की प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को 10 लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश प्रशासन को दिया।अदालत के फैसले के बाद न्यायिक गलियारों में यह चर्चा रही कि बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों में अब त्वरित और कठोर सजा का दौर शुरू हो चुका है। इस निर्णय से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ समाज में अपराधियों के लिए कड़ा संदेश गया है।

