मोहन हत्याकांड में दोषी द्वारिका पाण्डेय को उम्रकैद

नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने के बाद हुए विवाद ने आखिरकार खूनी मोड़ लिया था। बहुचर्चित मोहन कुमार हत्याकांड में बक्सर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त द्वारिका पांडे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर उसे छह माह अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

मोहन हत्याकांड में दोषी द्वारिका पाण्डेय को उम्रकैद

__ बक्सर कोर्ट का सख्त फैसला, एक लाख जुर्माना भी; होली के दिन हुई वारदात से मचा था हड़कंप

केटी न्यूज/बक्सर

नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने के बाद हुए विवाद ने आखिरकार खूनी मोड़ लिया था। बहुचर्चित मोहन कुमार हत्याकांड में बक्सर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अभियुक्त द्वारिका पांडे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर उसे छह माह अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।यह फैसला बक्सर थाना कांड संख्या 179/2024 और सेशन ट्रायल संख्या 240/2024 में सुनाया गया। अपर लोक अभियोजक विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला ने पूर्व में आरोपी को दोषी करार दिया था, जिसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया गया।

__होली के दिन हुई थी सनसनीखेज वारदात

घटना 26 मार्च 2024 की है, जब धनसोई निवासी मोहन कुमार की हत्या कर दी गई थी। होली के दिन हुई इस वारदात से पूरे बक्सर नगर में सनसनी फैल गई थी। मामले में मृतक के भाई दीपक कुमार ने नामजद प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए थे।दीपक कुमार के अनुसार, उसका भाई किसी काम से बक्सर आया था, लेकिन शाम को घर लौटने के बजाय शहर में ही रुक गया। बाद में वह खुद भी बक्सर पहुंचा। आरोप है कि देर शाम डीएवी स्कूल के सामने यश कॉम्प्लेक्स स्थित स्थान से द्वारिका पांडे मोहन कुमार को अपने साथ घर ले गया था।

__रात में आया फोन, अस्पताल में मिला शव

देर रात धनसोई पुलिस ने फोन कर दीपक कुमार को सूचना दी कि उसके भाई का एक्सीडेंट हो गया है। जब वह थाना पहुंचा तो देखा कि आरोपी लॉकअप में बंद है, जबकि उसका भाई एक निजी अस्पताल में मृत पड़ा है। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।परिजनों ने पुलिस को बताया था कि आरोपी ने कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी लगवाने के नाम पर मृतक से डेढ़ से दो लाख रुपये लिए थे। रुपये वापस मांगने पर विवाद बढ़ा और हत्या की आशंका जताई गई।

__ आठ गवाह बने सजा की मजबूत कड़ी

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों को अदालत में पेश किया। इनमें चिकित्सक और अनुसंधानकर्ता (आईओ) की गवाही को बेहद अहम माना गया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है, वहीं यह निर्णय ठगी और हत्या जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।