टॉवर चोरी या कोई और खेल? आवेदन के 48 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं, रहस्य गहराया
डुमरांव में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर की कथित चोरी का मामला दूसरे दिन भी रहस्य और चर्चाओं के घेरे में बना रहा। लाखों रुपये मूल्य के टॉवर, 15 केवीए डीजल जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के गायब होने की शिकायत मिलने के बावजूद पुलिस ने गुरुवार शाम तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

-- 131 फीट ऊंचा मोबाइल टॉवर, जनरेटर और उपकरण गायब होने के मामले में पुलिस अभी भी संशय में, कंपनी प्रबंधक व भू-स्वामी के थाना नहीं पहुंचने से उलझी जांच
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर की कथित चोरी का मामला दूसरे दिन भी रहस्य और चर्चाओं के घेरे में बना रहा। लाखों रुपये मूल्य के टॉवर, 15 केवीए डीजल जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के गायब होने की शिकायत मिलने के बावजूद पुलिस ने गुरुवार शाम तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पुलिस फिलहाल पूरे मामले को संदेहास्पद मानकर जांच कर रही है और घटना के हर पहलू को खंगालने में जुटी हुई है।जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के भूमि एवं संचालन पदाधिकारी बैद्यनाथ ओझा ने डुमरांव थाना में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि वार्ड संख्या 18 में स्थित कंपनी का मोबाइल टॉवर, जनरेटर और अन्य उपकरण अज्ञात चोरों द्वारा गायब कर दिए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। लोगों के बीच दिनभर यही सवाल गूंजता रहा कि आखिर 131 फीट ऊंचा टॉवर कोई कैसे चुरा सकता है और इतने बड़े ऑपरेशन की भनक किसी को क्यों नहीं लगी।मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने जांच शुरू की।

प्रभारी थानाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने बताया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद कंपनी के प्रतिनिधि और जिस जमीन पर टॉवर स्थापित था, उस भू-स्वामी दोनों को पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया था। हालांकि गुरुवार को पूरे दिन इंतजार के बावजूद दोनों पक्ष थाना नहीं पहुंचे। ऐसे में पुलिस अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला जितना सरल दिखाई दे रहा है, उतना है नहीं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि टॉवर वास्तव में चोरी हुआ है या फिर उसे किसी अन्य प्रक्रिया के तहत हटाया गया था। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने पर निर्णय लिया जाएगा।इधर, जमीन मालिक हरेनाथ यादव के बयान ने भी मामले को और पेचीदा बना दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में उनकी जमीन पर टॉवर लगाया गया था, इसका एग्रीमेंट 2022 तक का था और वर्ष 2017 तक उन्हें किराया मिलता रहा।

इसके बाद कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया। कई बार संपर्क और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे उस जमीन की ओर नहीं गए और उन्हें टॉवर चोरी होने की कोई जानकारी नहीं थी।हरेनाथ यादव ने यह भी बताया कि टॉवर बंद होने के बाद समय-समय पर वहां से छोटे-मोटे सामान चोरी होने की बातें सुनने में आती थीं, जिसकी जानकारी उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को भी दी थी। लेकिन कंपनी की ओर से कोई पहल नहीं की गई।इस बीच पूरे डुमरांव में यह मामला लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक टॉवर चोरी की चर्चा हो रही है। कोई इसे संगठित गिरोह की करतूत बता रहा है तो कोई इसे लापरवाही और लंबे समय से बंद पड़े टॉवर से जुड़ा मामला मान रहा है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है, जबकि टॉवर गायब होने का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है।

-- भू-स्वामी हरेनाथ यादव का बयान
वर्ष 2017 के बाद से कंपनी ने किराया देना बंद कर दिया था। कई बार कार्यालय गया, नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किराया नहीं मिलने के कारण मैं उस जमीन की तरफ जाना ही छोड़ दिया था। टॉवर बंद होने के बाद वहां से छोटे-छोटे सामान चोरी होने की सूचना मिलती थी, जिसकी जानकारी कंपनी को दी गई थी। टॉवर चोरी होने की जानकारी मुझे भी थाने के माध्यम से ही मिली है।
-- चार-पांच दिनों तक टॉवर में ही रूके थे चोर
जानकारी के अनुसार जिन चोरों ने टॉवर की चोरी की है, वे करीब 15-20 दिन पूर्व आए थे तथा जिस भू-भाग पर टॉवर लगा है, उसी परिसर में चार-पांच दिनों तक रहे थे। इस दौरान वे वहीं पर खाना भी पकाते थे। वे जिस दुस्साहस के साथ चोरी किए है, उससे भू-स्वामी व आस-पास के लोगों को लगा था कि ये कंपनी की तरफ से ही आए है, लेकिन मामला प्रकाश में आने के बाद लोग अचंभित है तथा चोरों के दुस्साहस की चर्चा कर रहे है।

बयान
टॉवर चोरी होने की जानकारी मिलते ही घटना स्थल का जायजा लिया तथा भू-स्वामी से पूछताछ की गई। प्रथम दृष्टया यह मामला संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है। कंपनी के प्रबंधक व भू-स्वामी दोनों को बुलाया गया है, जल्दी ही इस मामले का उद्भेदन कर लिया जाएगा। - पोलस्त कुमार, एसडीपीओ, डुमरांव
