जच्चा-बच्चा किट वितरण में गड़बड़ी पर सीएस सख्त, 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट
डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला जच्चा-बच्चा पोषण किट वितरण योजना में कथित गड़बड़ी का है, जहां सरकारी रिकॉर्ड में सैकड़ों प्रसूताओं को किट बांटने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आरटीआई से सामने आए दस्तावेजों और लाभुकों के बयानों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।


_ आरटीआई से खुला राज, अस्पताल का दावा बांटे गए 533 किट, लाभुक बोले– “न किट मिली, न किसी ने जानकारी दी
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला जच्चा-बच्चा पोषण किट वितरण योजना में कथित गड़बड़ी का है, जहां सरकारी रिकॉर्ड में सैकड़ों प्रसूताओं को किट बांटने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आरटीआई से सामने आए दस्तावेजों और लाभुकों के बयानों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामला उजागर होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने सख्त रुख अपनाते हुए अस्पताल उपाधीक्षक से 24 घंटे के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है।पूरा मामला तब सामने आया जब नंदन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हरेकृष्ण सिंह यादव ने सूचना के अधिकार के तहत जच्चा-बच्चा किट वितरण से संबंधित जानकारी मांगी।

अस्पताल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में दावा किया गया कि वर्ष 2025 में कुल 533 जच्चा-बच्चा किट तीन चरणों में वितरित की गईं। दस्तावेजों के अनुसार 13 जून 2025 को 153, 1 अगस्त 2025 को 190 तथा 15 अक्टूबर 2025 को 190 किट बांटी गईं। प्रत्येक किट की कीमत लगभग 1500 से 2000 रुपये बताई गई है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च दिखाए जाने के बावजूद लाभुकों तक योजना पहुंची भी या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है।जब कथित लाभुकों से संपर्क किया गया तो कई महिलाओं और उनके परिजनों ने साफ कहा कि उन्हें किसी प्रकार की जच्चा-बच्चा किट नहीं मिली। कृष्णाब्रह्म क्षेत्र की खुशबू कुमारी के पति दीपक नट ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी योजना की जानकारी तक नहीं दी गई। रावलडेरा निवासी प्रियंका के पति मुकेश यादव ने भी किट मिलने से इनकार किया।

वहीं नंदन गांव की दुली कुमारी और गीता कुमारी के परिजनों ने भी यही बात दोहराई कि अस्पताल में प्रसव के दौरान भोजन तो मिला, लेकिन किसी किट का वितरण नहीं हुआ।मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह चर्चा सामने आई कि अस्पताल प्रबंधन ने कुछ चुनिंदा लाभुकों को किट देकर उसकी तस्वीरें मीडिया में जारी कीं और उसी आधार पर सभी 533 प्रसूताओं को लाभान्वित दिखा दिया गया। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो मामला सिर्फ कागजी अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का रूप ले सकता है।सूत्रों के अनुसार, मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के अंदर भी बेचैनी बढ़ गई है। जिन स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, वे अब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने में जुटे हैं।

विभागीय स्तर पर भी दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है। कई कर्मचारियों के बीच अंदरखाने खींचतान शुरू हो गई है और हर कोई खुद को बचाने की कोशिश में लगा है।सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अस्पताल उपाधीक्षक को निर्देश दिया है कि अखबार में प्रकाशित तथ्यों की जांच कर सभी दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने साफ कहा कि यदि अनियमितता सिद्ध हुई तो दोषियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई तय है।हालांकि शिकायतकर्ता हरेकृष्ण सिंह यादव स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

उन्होंने जिला स्वास्थ्य समिति के साथ-साथ पटना में स्वास्थ्य सचिव से मिलकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई तो वे स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर पूरे मामले को राज्य स्तर तक उठाएंगे।इधर, अब इस मामले से जुड़े और भी गंभीर आरोप सामने आने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि जच्चा-बच्चा किट के अलावा कॉपर-टी लगाने के नाम पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है। बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं को कॉपर-टी लगाने के एवज में 300 रुपये की सहायता राशि दिखायी गई है, उनमें भी कई नाम संदिग्ध हो सकते हैं। यदि यह आरोप भी सही निकले, तो डुमरांव अस्पताल में स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर चल रहे खेल की परतें और गहरी हो सकती हैं।

