गेट पर हुआ प्रसव, सिस्टम फेल: चक्की पीएचसी में लापरवाही पर सिविल सर्जन सख्त
चक्की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अस्पताल के मुख्य गेट पर प्रसूता का प्रसव होने की घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है, जहां सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण पर जवाब-तलब किया है।
__ ड्यूटी रोस्टर की गड़बड़ी, स्टाफ नदारद और समन्वय की कमी से बनी शर्मनाक स्थिति, जिम्मेदारी तय करने में उलझा प्रशासन
केटी न्यूज/चक्की
चक्की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में अस्पताल के मुख्य गेट पर प्रसूता का प्रसव होने की घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है, जहां सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे प्रकरण पर जवाब-तलब किया है।सिविल सर्जन ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंजनी कुमार को पत्र जारी कर पूछा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

घटना गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे की है। भोला डेरा निवासी गर्भवती महिला को सुबह प्रसव पीड़ा के बाद पीएचसी में भर्ती कराया गया था, लेकिन पूरे दिन न डॉक्टर उपलब्ध रहे और न ही नर्सिंग स्टाफ ने समुचित देखभाल की। हालत बिगड़ने पर परिजन महिला को निजी अस्पताल ले जाने लगे, तभी अस्पताल गेट पर ही प्रसव हो गया। मौके पर मौजूद महिलाओं और ममता दीदियों ने साड़ी से घेरकर सुरक्षित प्रसव कराया—जो सिस्टम की विफलता पर बड़ा सवाल है।मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। ड्यूटी पर तैनात एएनएम बिना प्रतिस्थानी के ड्यूटी छोड़कर चली गई, जिसे सिविल सर्जन ने “अमानवीय और अनुशासनहीन” करार दिया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करने के बजाय जीएनएम सारिका कुमारी से स्पष्टीकरण मांग लिया।

सारिका कुमारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी ड्यूटी रोस्टर में बदलाव कर दिया गया था, जो स्वयं प्रभारी द्वारा किया गया था। ऐसे में जिम्मेदारी को लेकर भ्रम और गहराता जा रहा है।पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पीएचसी में ड्यूटी प्रबंधन, स्टाफ उपलब्धता और आपसी समन्वय पूरी तरह चरमराया हुआ है। सिविल सर्जन ने कहा कि जांच जारी है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत भी उजागर करती है।

