डुमरांव एसडीपीओ कार्यालय में डीआईजी की सख्त दस्तक, लंबित कांडों पर अफसरों को साफ चेतावनी
डुमरांव अनुमंडल पुलिस कार्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब डीआईजी सत्य प्रकाश औचक निरीक्षण पर पहुंचे। यह निरीक्षण लंबित कांडों को लेकर पुलिस की कार्यशैली की कड़ी परीक्षा साबित हुआ। डीआईजी ने साफ शब्दों में संदेश दे दिया कि अब फाइलों में दबे मामलों और सुस्त अनुसंधान के लिए कोई जगह नहीं है।
-- पुराने मामलों के त्वरित निष्पादन का अल्टीमेटम, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव अनुमंडल पुलिस कार्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब डीआईजी सत्य प्रकाश औचक निरीक्षण पर पहुंचे। यह निरीक्षण लंबित कांडों को लेकर पुलिस की कार्यशैली की कड़ी परीक्षा साबित हुआ। डीआईजी ने साफ शब्दों में संदेश दे दिया कि अब फाइलों में दबे मामलों और सुस्त अनुसंधान के लिए कोई जगह नहीं है।निरीक्षण की शुरुआत डीआईजी ने कार्यालय में संधारित रजिस्टरों और अभिलेखों से की। एक-एक कर उन्होंने लंबित कांडों की स्थिति, अनुसंधान की प्रगति और निष्पादन की रफ्तार की समीक्षा की।

कई मामलों में देरी को लेकर उन्होंने असंतोष जाहिर किया और संबंधित अधिकारियों से सीधे जवाब तलब किया। डीआईजी ने निर्देश दिया कि वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किया जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और पुलिस पर जनता का भरोसा बना रहे।डीआईजी सत्य प्रकाश ने दो टूक कहा कि अनुसंधान में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को चेताया कि साक्ष्य संकलन, गवाहों के बयान और विधिसम्मत कार्रवाई में कोताही सामने आई तो जिम्मेदारी तय होगी।

विशेष रूप से गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।निरीक्षण के दौरान एसपी शुभम आर्य ने जिले की कानून-व्यवस्था, हालिया घटनाओं और अपराध नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित गश्त, जनता दरबार और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से आम लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा रहा है। इस पर डीआईजी ने निर्देश दिया कि इन पहलों का असर जमीन पर दिखना चाहिए।

डीआईजी ने पुलिसकर्मियों की समस्याएं भी सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया, लेकिन साथ ही अनुशासन और जवाबदेही पर कोई समझौता न करने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्रवाई ही पुलिस की असली पहचान है।निरीक्षण के अंत में डीआईजी ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मियों की सराहना की, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में लंबित कांडों की प्रगति पर कड़ी नजर रखी जाएगी। कुल मिलाकर यह निरीक्षण एक साफ संदेश था, अब ढिलाई नहीं, सिर्फ परिणाम चाहिए।
