शीतलहर में ‘जलपुत्र’ बने अजय, दरवाज़े-दरवाज़े पहुंचाकर बांटे कंबल
बढ़ती शीतलहर ने जब आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है, तब डुमरांव में ‘जलपुत्र’ के नाम से पहचाने जाने वाले अजय एक बार फिर मानवता की मिसाल बनकर सामने आए हैं। कंपकंपाती ठंड में जहां लोग घरों से निकलने से कतराते हैं, वहीं अजय जरूरतमंदों के घर-घर पहुंचकर कंबल वितरण कर रहे हैं। वार्ड संख्या 28, 35 सहित कई अन्य वार्डों में उन्होंने गरीब, असहाय और बेसहारा लोगों को कंबल देकर उन्हें ठंड से राहत पहुंचाई।
केटी न्यूज/डुमरांव
बढ़ती शीतलहर ने जब आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है, तब डुमरांव में ‘जलपुत्र’ के नाम से पहचाने जाने वाले अजय एक बार फिर मानवता की मिसाल बनकर सामने आए हैं। कंपकंपाती ठंड में जहां लोग घरों से निकलने से कतराते हैं, वहीं अजय जरूरतमंदों के घर-घर पहुंचकर कंबल वितरण कर रहे हैं। वार्ड संख्या 28, 35 सहित कई अन्य वार्डों में उन्होंने गरीब, असहाय और बेसहारा लोगों को कंबल देकर उन्हें ठंड से राहत पहुंचाई।इस पहल की खास बात यह रही कि कंबल वितरण केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अजय स्वयं जरूरतमंदों के दरवाजे तक पहुंचे।

बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के चेहरों पर कंबल पाकर जो मुस्कान दिखी, वही इस सेवा कार्य की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि अजय इससे पहले भी कई बार जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कर चुके हैं और हर बार बिना किसी प्रचार के चुपचाप सेवा में जुट जाते हैं।अजय ने बताया कि ठंड के मौसम में गरीबों और असहायों के लिए ऊनी कंबल या गर्म कपड़े केवल वस्त्र नहीं होते, बल्कि यह उन्हें सुरक्षा, संवेदना और उम्मीद का एहसास कराते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज की असली ताकत तभी सामने आती है, जब हम संकट की घड़ी में एक-दूसरे का हाथ थामते हैं। उनका मानना है कि भोजन, चिकित्सा सहायता और वस्त्र वितरण जैसे राहत कार्य समाज को जोड़ने का काम करते हैं।शीतलहर के इस दौर में अजय की पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

