प्यासे गांवों को राहत देने की कवायद तेज

गर्मी का पारा चढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। कई गांवों में खराब पड़े चापाकलों के कारण लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा था। ऐसे हालात को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने जिलेभर में विशेष मरम्मत अभियान तेज कर दिया है।

प्यासे गांवों को राहत देने की कवायद तेज

__  खराब चापाकलों को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान, आधे से अधिक हैंडपंप चालू

केटी न्यूज/डुमरांव

गर्मी का पारा चढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। कई गांवों में खराब पड़े चापाकलों के कारण लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा था। ऐसे हालात को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने जिलेभर में विशेष मरम्मत अभियान तेज कर दिया है। विभाग का दावा है कि अब तक सैकड़ों खराब चापाकलों को ठीक कर दोबारा चालू कर दिया गया है, जबकि शेष को जल्द दुरुस्त करने की प्रक्रिया जारी है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार बक्सर जिले में कुल 1097 खराब चापाकलों की मरम्मत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें लगभग 600 चापाकलों की मरम्मत पूरी कर ली गई है। इससे कई गांवों में लोगों को राहत मिलने लगी है। विभागीय टीम लगातार गांवों का दौरा कर खराब चापाकलों की पहचान कर रही है और प्राथमिकता के आधार पर उन्हें दुरुस्त कराया जा रहा है।

गर्मी बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्तर नीचे चला गया है। इसका असर चापाकलों पर भी पड़ा है। कई जगह पाइप खराब हो गए हैं तो कहीं हेड और प्लेटफार्म क्षतिग्रस्त पाए गए। कुछ चापाकलों में तकनीकी खराबी के कारण पानी निकलना बंद हो गया था। ऐसे में ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा था। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही थी।पीएचईडी द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत मरम्मत कार्य में तेजी लाई गई है। विभाग ने आवश्यक सामग्री की खरीद भी शुरू कर दी है। पाइप, हेड, प्लेटफार्म समेत अन्य उपकरण उपलब्ध कराकर टीमों को गांवों में भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक चापाकल मरम्मत अभियान पर करीब 11 लाख 45 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें मजदूरी मद में 4 लाख 89 हजार रुपये तथा सामग्री मद में 6 लाख 56 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं। विभाग का मानना है कि समय पर मरम्मत कार्य पूरा होने से ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट काफी हद तक कम किया जा सकेगा।पीएचईडी डुमरांव के सहायक अभियंता मो. इस्लाम ने बताया कि विभाग को मिले लक्ष्य के अनुरूप तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक करीब 600 चापाकलों को ठीक कर चालू कर दिया गया है। शेष चापाकलों की मरम्मत भी युद्धस्तर पर चल रही है। विभाग का प्रयास है कि भीषण गर्मी के दौरान किसी गांव में पेयजल की समस्या उत्पन्न न होने पाए।