एकौना बना आस्था का केंद्र, तीन दिवसीय वैदिक महाआयोजन शुरू
सिमरी प्रखंड के एकौना गांव में रविवार को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव स्थित काली मंदिर परिसर में तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।


--भव्य कलश यात्रा में उमड़ी श्रद्धा, संस्कारों से लेकर दीप महायज्ञ तक होंगे विविध कार्यक्रम
केटी न्यूज/डुमरांव
सिमरी प्रखंड के एकौना गांव में रविवार को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव स्थित काली मंदिर परिसर में तीन दिवसीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। गंगा तट से पवित्र जल लेकर निकली शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।सुबह से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाट पर जुटना शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर मंदिर परिसर तक यात्रा निकाली। पारंपरिक परिधानों में शामिल महिलाओं और युवतियों की लंबी कतारें आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा मार्ग पर जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक नारों से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।

आयोजन गायत्री शक्तिपीठ से जुड़े रामानंद तिवारी के नेतृत्व में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में यज्ञशाला में वैदिक विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।दो जून को आयोजित होने वाले संस्कार महोत्सव में पुंसवन, नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत और गुरु दीक्षा जैसे पारंपरिक संस्कार कराए जाएंगे। इसके लिए बड़ी संख्या में परिवारों ने पहले ही पंजीकरण कराया है। आयोजकों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली के बीच ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

इसी दिन संध्या में विराट गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजन होगा। हजारों दीपों की रोशनी से यज्ञ स्थल जगमगाएगा, जहां श्रद्धालु जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य पारिवारिक अवसरों को वैदिक परंपरा के अनुरूप मनाएंगे।महायज्ञ का समापन तीन जून को पूर्णाहुति के साथ होगा। इस दौरान विश्व शांति, मानव कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना के साथ विशेष आहुतियां दी जाएंगी। पूर्णाहुति के बाद महाप्रसाद वितरण तथा शांतिकुंज से आए प्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

