गुरुदेव की स्मृति में बहे भक्ति के सोपान, विश्वामित्र-दशरथ संवाद सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

श्री हनुमत धाम मंदिर परिसर में आयोजित श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव का तीसरा दिन भक्ति, भाव और वैराग्य से सराबोर रहा। अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण ने प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल और ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन के प्रसंग का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। गुरुदेव मामाजी महाराज की पावन स्मृति में चल रहे इस महोत्सव में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उत्साह देखते ही बन रहा है।

गुरुदेव की स्मृति में बहे भक्ति के सोपान, विश्वामित्र-दशरथ संवाद सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

केटी न्यूज/बक्सर

श्री हनुमत धाम मंदिर परिसर में आयोजित श्री सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव का तीसरा दिन भक्ति, भाव और वैराग्य से सराबोर रहा। अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध कथा व्यास पंडित विजय नारायण शरण ने प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल और ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन के प्रसंग का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। गुरुदेव मामाजी महाराज की पावन स्मृति में चल रहे इस महोत्सव में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उत्साह देखते ही बन रहा है।

-- विश्वामित्र-दशरथ संवाद, त्याग और धर्म का अद्भुत संगम

कथा के तीसरे दिन व्यास पीठ से पंडित विजय नारायण शरण जी ने विश्वामित्र-दशरथ संवाद का अत्यंत मार्मिक और प्रेरक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब यज्ञ की रक्षा और राक्षसों के संहार के लिए ऋषि विश्वामित्र अयोध्या नरेश महाराज दशरथ से उनके ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम को मांगने पहुंचे, तो पिता का हृदय दुविधा से भर उठा। एक ओर पुत्र-मोह था तो दूसरी ओर धर्म की पुकार।कथा व्यास ने स्पष्ट किया कि यह संवाद केवल राजा और ऋषि के बीच का वार्तालाप नहीं था, बल्कि यह जीव और ब्रह्म के मिलन की भूमिका थी। उन्होंने कहा कि जब धर्म की रक्षा का प्रश्न हो, तब मोह का त्याग ही सच्चा समर्पण है। महाराज दशरथ द्वारा अपने प्रिय पुत्रों को ऋषि के साथ भेजने का निर्णय सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का आधार बना।

-- गुरु आज्ञा और आत्मशुद्धि का संदेश

कथा के दौरान पंडित विजय नारायण शरण जी ने पूज्य मामा जी महाराज और श्री महात्मा जी के आध्यात्मिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि जैसे श्रीराम ने गुरु की आज्ञा को सर्वाेपरि मानकर असुरों का संहार किया, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर अपने भीतर के विकारों, अहंकार और अज्ञान का नाश करना चाहिए। यही सच्ची साधना और भक्ति है।

-- भक्ति, संकीर्तन और उल्लास का अनुपम दृश्य

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे श्री भक्तमाल के सामूहिक सस्वर गायन से हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भक्ति का रस घोला। दोपहर में कथा के दौरान पूरा पंडाल “श्री राम जय राम” के संकीर्तन से गूंज उठा। वातावरण भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु झूमते नजर आए।

-- 4 फरवरी को होगा विशाल भंडारा

आयोजन समिति ने जानकारी दी कि यह पुण्य स्मृति महोत्सव 4 फरवरी तक चलेगा। समापन के दिन 4 फरवरी को दोपहर 1 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं को सपरिवार प्रसाद ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है।