बिजली विभाग या ट्रिपिंग विभाग? बार बार ट्रिपिंग और विभाग के बहानों से त्रस्त जनता

डुमरांव अनुमंडल में इन दिनों बिजली व्यवस्था ऐसी हो गई है मानो विभाग ने उपभोक्ताओं को बिजली नहीं, बल्कि सरप्राइज पैकेज दे रखा हो। कब लाइट आएगी, कब जाएगी, कब ट्रिप करेगी और कब ट्रांसफार्मर जवाब दे देगा इसका अंदाजा शायद विभाग को भी नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग अब बिजली विभाग के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। मंगलवार की रात पुराना भोजपुर में लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा।

बिजली विभाग या ट्रिपिंग विभाग? बार बार ट्रिपिंग और विभाग के बहानों से त्रस्त जनता

--रात भर हंगामा, दिन भर शिकायत  फिर भी सब कंट्रोल में बताने में जुटा विभाग

केटी न्यूज/डुमरांव 

डुमरांव अनुमंडल में इन दिनों बिजली व्यवस्था ऐसी हो गई है मानो विभाग ने उपभोक्ताओं को बिजली नहीं, बल्कि सरप्राइज पैकेज दे रखा हो। कब लाइट आएगी, कब जाएगी, कब ट्रिप करेगी और कब ट्रांसफार्मर जवाब दे देगा इसका अंदाजा शायद विभाग को भी नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग अब बिजली विभाग के खिलाफ खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। मंगलवार की रात पुराना भोजपुर में लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। शाम से ही बिजली गुल थी। लोगों ने बार-बार शिकायत की, कंट्रोल रूम में फोन मिलाए, जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। घंटों इंतजार के बाद जब बिजली नहीं आई तो दर्जनों ग्रामीण रात में पीएसएस गेट पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। लोगों का कहना था कि विभाग के अधिकारी फोन उठाने तक की जहमत नहीं उठाते, जबकि आम लोग उमस भरी गर्मी में पूरी रात जागने को मजबूर हैं।

--जैसे तैसे चल रही है व्यवस्था

हंगामे के बाद जैसे-तैसे विभाग की नींद खुली और बुधवार की सुबह आपूर्ति बहाल की गई। यानी जब तक जनता सड़क पर उतरकर विरोध न करे, तब तक व्यवस्था शायद तकनीकी खराबी की चादर ओढ़कर आराम करती रहती है। इधर सोशल मीडिया और साइबर सेनानी ग्रुप अब शिकायत केंद्र बन चुका है। नावाडेरा निवासी राजेश उर्फ सोनू यादव ने मंगलवार की रात 10:10 बजे ग्रुप में संदेश डालकर बताया कि उनके गांव में दो घंटे से बिजली गायब है। कंट्रोल रूम में फोन करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में जेई और एसडीओ से संपर्क किया गया तब कहीं जाकर अस्थायी रूप से बिजली आई। लेकिन विभाग की कर्मठता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन घंटे बाद फिर आपूर्ति ठप हो गई। बुधवार की दोपहर तकनीकी खराबी दूर होने के बाद बिजली बहाल की गई।

--अधिकारियों की पुष्टि के बाद भी नहीं बदला गया ट्रांसफार्मर 

लोगों का कहना है कि अब बिजली विभाग की कार्यशैली ऐसी हो गई है जिसमें स्थायी समाधान कम और जुगाड़ मॉडल ज्यादा दिखाई देता है। खराब लाइन हो तो अस्थायी जोड़, ट्रांसफार्मर खराब हो तो तेल भरकर काम चलाओ, पोल टूटे तो रस्सी बांध दो, बस किसी तरह दिन काटो। वार्ड 13 के पार्षद राजेश कुमार सिंह ने दो दिन पहले साइबर सेनानी ग्रुप में सूचना दी थी कि उनके इलाके का ट्रांसफार्मर तेल लीक कर रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया कि ट्रांसफार्मर डिफेक्टिव है और जल्द बदला जाएगा। लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया। अब हालत यह है कि उसमें बार-बार तेल डालकर जैसे-तैसे बिजली सप्लाई चलाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

--पोल पर खतरे की घंटी दे रहा है ट्रांसफार्मर 

उधर डुमरांव के कलावती कॉम्प्लेक्स के बगल में लगा ट्रांसफार्मर किसी अज्ञात वाहन की टक्कर के बाद खतरनाक स्थिति में पोल पर टिका हुआ है। लोगों में भय है कि वह कभी भी गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है। शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई। ऐसा लगता है कि विभाग का सिद्धांत साफ है जब तक दुर्घटना न हो, तब तक समस्या गंभीर नहीं। पूरे अनुमंडल में बिजली ट्रिपिंग अब आम बात हो गई है। हर दस-पंद्रह मिनट पर बिजली का आना-जाना लोगों की दिनचर्या बिगाड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, दुकानदार परेशान हैं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो रहे हैं और आम लोग गर्मी से बेहाल हैं। लेकिन जिम्मेदार अभियंताओं की प्राथमिकता शायद शिकायत सुनना नहीं, बल्कि फोन साइलेंट रखना बन चुकी है। फिलहाल डुमरांव अनुमंडल की जनता यही पूछ रही है कि आखिर बिजली विभाग समाधान देगा या सिर्फ ट्रिपिंग और आश्वासन के भरोसे ही पूरी गर्मी निकालने की तैयारी है?