सरेंजा में वैज्ञानिक खेती पर जोर, पराली जलाने की बजाय आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सलाह
प्रखंड के सरेंजा पंचायत में गुरुवार को कृषि विभाग की ओर से किसानों के बीच वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी राकेश कुमार ने की, जबकि इसमें अनुमंडल कृषि पदाधिकारी विकास कुमार और कृषि समन्वयक शशिभूषण सिंह सहित कई किसान मौजूद रहे।
केटी न्यूज/चौसा
प्रखंड के सरेंजा पंचायत में गुरुवार को कृषि विभाग की ओर से किसानों के बीच वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जागरूकता बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी राकेश कुमार ने की, जबकि इसमें अनुमंडल कृषि पदाधिकारी विकास कुमार और कृषि समन्वयक शशिभूषण सिंह सहित कई किसान मौजूद रहे।बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से अवगत कराना और पराली जलाने की परंपरा को छोड़ने के लिए प्रेरित करना था। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि पराली जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, बल्कि भूमि में मौजूद लाभकारी जीवाणु और कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भविष्य की फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

अधिकारियों ने किसानों को यह भी जानकारी दी कि कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्र 50 से 80 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर और स्ट्रा बेलर जैसे उपकरण शामिल हैं, जो खेत में बचे अवशेषों को उपयोगी बनाने में मददगार साबित होते हैं।इसके अलावा, किसानों को पूसा डीकंपोजर कैप्सूल के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि इसके प्रयोग से पराली को 20 से 25 दिनों के भीतर सड़ाकर जैविक खाद में बदला जा सकता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही पराली को मल्च के रूप में उपयोग कर खेत की नमी को भी संरक्षित रखा जा सकता है।बैठक के अंत में किसानों से अपील की गई कि वे पर्यावरण संरक्षण और बेहतर उत्पादन के लिए पराली जलाने की बजाय वैज्ञानिक एवं टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाएं।

