डुमरी मौजा के किसानों को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ, लगान शून्य होने से बढ़ी परेशानी
सिमरी अंचल क्षेत्र अंतर्गत डुमरी पंचायत के डुमरी मौजा के किसान बीते लगभग एक दशक से गंभीर प्रशासनिक समस्या से जूझ रहे हैं। करीब 500 हेक्टेयर भूमि, जिसमें आवासीय, खेतिहर और बगीचा युक्त भूखंड शामिल हैं, पर काबिज लगान की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण किसानों को सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लगान रिकॉर्ड में गड़बड़ी के चलते किसान न तो आवास योजना, न ही कृषि से जुड़ी अन्य सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
केटी न्यूज/सिमरी
सिमरी अंचल क्षेत्र अंतर्गत डुमरी पंचायत के डुमरी मौजा के किसान बीते लगभग एक दशक से गंभीर प्रशासनिक समस्या से जूझ रहे हैं। करीब 500 हेक्टेयर भूमि, जिसमें आवासीय, खेतिहर और बगीचा युक्त भूखंड शामिल हैं, पर काबिज लगान की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण किसानों को सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लगान रिकॉर्ड में गड़बड़ी के चलते किसान न तो आवास योजना, न ही कृषि से जुड़ी अन्य सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।इस समस्या को लेकर डुमरी पंचायत के मुखिया प्रेम सागर कुवर के नेतृत्व में मौजा के कई रैयतों ने राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव, जिलाधिकारी बक्सर और अपर समाहर्ता (राजस्व) को लिखित आवेदन सौंपकर समाधान की मांग की है।

किसानों का कहना है कि वर्ष 2016 से डुमरी मौजा की अधिकांश भूमि का लगान नहीं कट रहा है, जिससे सरकारी अभिलेखों में उनकी भूमि की स्थिति संदिग्ध बनी हुई है।मुखिया प्रेम सागर कुवर ने बताया कि वर्ष 2008 के सर्वे के आधार पर डुमरी मौजा की भूमि का लगान निर्धारित किया गया था और उस समय ऑफलाइन लगान भी कटता था। लेकिन जैसे ही व्यवस्था ऑनलाइन हुई, मौजा की बड़ी आबादी वाली भूमि का लगान शून्य दर्शाने लगा। वर्तमान में डुमरी मौजा की मात्र 25 प्रतिशत भूमि का ही नियमित लगान कट रहा है, जबकि शेष भूमि के रैयत खुद को प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार मान रहे हैं।

इस मामले में डुमरांव के डीसीएलआर टेश लाल सिंह ने स्पष्ट किया है कि काबिज लगान युक्त भूमि से संबंधित रैयत ऑनलाइन आवेदन करें और भूमि से जुड़े आवश्यक दस्तावेज ऑफलाइन कार्यालय में जमा करें। इसके बाद अंचल अमीन द्वारा भूमि की मापी कराई जाएगी तथा स्थानीय अंचलाधिकारी से स्पष्ट प्रतिवेदन प्राप्त किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद संबंधित भूमि का लगान निर्धारण कर दिया जाएगा।फिलहाल किसान प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके और वे सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

