नैनीजोर को निगल रही गंगा की धार, ग्रामीणों का धैर्य टूटा: तीसरे दिन भी जारी धरना, स्थायी कटावरोधी कार्य की मांग तेज
गंगा नदी के लगातार बढ़ते कटाव ने ब्रह्मपुर प्रखंड के नैनीजोर गांव के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी की विकराल होती धारा से गांव के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। गंगा कटाव से स्थायी निजात और सुरक्षा के लिए शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा।

__ आश्वासन नहीं, अब चाहिए पक्का समाधान” — आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप, बोले- समय रहते नहीं चेते तो मिट जाएगा गांव का अस्तित्व
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर
गंगा नदी के लगातार बढ़ते कटाव ने ब्रह्मपुर प्रखंड के नैनीजोर गांव के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी की विकराल होती धारा से गांव के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। गंगा कटाव से स्थायी निजात और सुरक्षा के लिए शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा।नैनीजोर के सुंदर टोला के समीप बक्सर-कोईलवर तटबंध के किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे और सरकार व प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर स्थायी कटावरोधी कार्य शुरू होना चाहिए।

धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि गंगा की तेज धारा लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। हर दिन कटाव का दायरा बढ़ने से लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में नैनीजोर भी गंगा की धारा में अपना अस्तित्व खो सकता है।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मैनेजर यादव ने कहा कि नैनीजोर के ग्रामीण इस समस्या को लेकर पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। पिछले वर्ष भी कटाव के खिलाफ लंबा संघर्ष किया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन विधायक डॉ. स्वामीनाथ तिवारी को भी आमरण अनशन तक करना पड़ा था। आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों ने मौके पर पहुंचकर स्थायी समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार केवल आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया जाता है, जबकि गंगा कटाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण किसी भी कीमत पर केवल कागजी योजनाओं और वादों पर भरोसा नहीं करेंगे।धरना में पूर्व मुखिया राजकिशोर प्रसाद, राजकिशोर तिवारी, जगनारायण यादव, बीरबल यादव, घनश्याम यादव, पशुराम यादव, धर्मदेव तिवारी, बुधन गोंड सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी ग्यारह सूत्री मांगों पर जब तक प्रशासन गंभीर पहल नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।ग्रामीणों का कहना है कि गंगा कटाव का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की जिंदगी और भविष्य पर भी संकट मंडरा रहा है।

घर, खेत और वर्षों की मेहनत नदी की धारा में समाने के डर से लोग परेशान हैं।खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक चिंतित हैं।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थायी कटावरोधी योजना पर काम शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने भोजपुर जिले के जवइनिया गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गंगा कटाव ने वहां गांव का स्वरूप बदल दिया, वैसी स्थिति नैनीजोर में नहीं आने दी जाएगी।ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल वैज्ञानिक तरीके से कटाव रोकने के उपाय किए जाएं और गांव की सुरक्षा के लिए स्थायी तटबंध एवं सुरक्षा कार्य कराया जाए, ताकि नैनीजोर को गंगा की विनाशकारी धारा से बचाया जा सके।

