सफाईकर्मियों के बाद अफसरों ने भी थामा मोर्चा, निकायों पर लटके ताले

बक्सर जिले के नगर निकायों में पहले सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था अब अधिकारियों के सामूहिक अवकाश और हड़ताल से पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले पांच दिनों से सफाईकर्मियों की हड़ताल के बीच अब नगर कार्यपालक पदाधिकारी और स्वच्छता अधिकारी भी अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं।

सफाईकर्मियों के बाद अफसरों ने भी थामा मोर्चा, निकायों पर लटके ताले

__ बक्सर के पांचों नगर निकायों में प्रशासनिक कामकाज ठप, ईओ व स्वच्छता अधिकारियों का अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश; सुरक्षा की मांग पर अड़े अधिकारी, कूड़ा उठाव से लेकर नागरिक सेवाएं तक प्रभावित

केटी न्यूज/बक्सर।

बक्सर जिले के नगर निकायों में पहले सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था अब अधिकारियों के सामूहिक अवकाश और हड़ताल से पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले पांच दिनों से सफाईकर्मियों की हड़ताल के बीच अब नगर कार्यपालक पदाधिकारी और स्वच्छता अधिकारी भी अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। अधिकारियों ने कार्यालयों के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। इससे जिले के सभी पांच नगर निकायों में प्रशासनिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।नगर कार्यालयों में ताला लटका देख जरूरी काम से पहुंचे आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को निराश होकर लौटना पड़ा। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, सफाई, राजस्व, निर्माण, अतिक्रमण और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित होने लगे हैं। एक साथ सफाईकर्मियों और अधिकारियों के आंदोलन में उतरने से शहरों की सफाई व्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है। कई इलाकों में कूड़ा उठाव प्रभावित होने से आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

__ अधिकारी की हत्या के बाद सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

अधिकारियों का यह आंदोलन मुख्य रूप से बिहार नगर सेवा संघ और बिहार नगर स्वच्छता सेवा संघ के संयुक्त आह्वान पर शुरू हुआ है। डेहरी डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की असामाजिक तत्वों द्वारा हत्या की घटना के बाद नगर निकायों के अधिकारियों में असुरक्षा और आक्रोश गहरा गया है। संघ का कहना है कि फील्ड में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण वे लगातार जोखिम में काम कर रहे हैं।

__ दो करोड़ मुआवजा से लेकर सीबीआई जांच तक मांग

संघ ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। मृत कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को दो करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि, आश्रित को सरकारी नौकरी देने तथा मामले की त्वरित सुनवाई के लिए एसआईटी और सीबीआई जांच की मांग की गई है।अधिकारियों ने नगर निकायों के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच की भी मांग की है। इसके तहत प्रत्येक कार्यपालक पदाधिकारी को एक बिहार पुलिस पीएसओ, कार्यालयों में छह सशस्त्र सुरक्षा गार्ड तथा आत्मरक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस देने की मांग शामिल है।

__ पे-लेवल 7 से 9 करने की मांग

वेतनमान को लेकर भी अधिकारियों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखी है। बीपीएससी और दूसरे राज्यों में समान पदों के वेतनमान का हवाला देते हुए कार्यपालक पदाधिकारियों का वेतनमान पे-लेवल 7 से बढ़ाकर पे-लेवल 9 करने की मांग की गई है।इसके अलावा अतिक्रमण हटाने, जब्ती और जुर्माना जैसी कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने तथा अधिकारियों के खिलाफ बिना शपथ पत्र के झूठी शिकायतों पर दंडात्मक कार्रवाई के लिए स्पष्ट एसओपी बनाने की मांग भी की गई है।

__ “लिखित आदेश तक आंदोलन जारी रहेगा”

स्वच्छता संघ के अध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि फील्ड में अपशिष्ट प्रबंधन और छापेमारी के दौरान अधिकारियों व कर्मियों को लगातार असामाजिक तत्वों के विरोध और हमले का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि सरकार जब तक वार्ता में सहमति बनी मांगों पर आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करती और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।सफाईकर्मियों के बाद अधिकारियों के भी आंदोलन में उतरने से अब नगर निकायों की पूरी प्रशासनिक मशीनरी की रफ्तार थम गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन समाप्त कराने के साथ-साथ शहरों की चरमराई नागरिक सेवाओं को पटरी पर लाना है।