सुशासन की सरकार में दूसरे की जमीन पर लाल झंडा गाड़ोगे तो शरीर से बांह अलग हो जाएगा - प्रदीप राय
यह 1990 का दौर नहीं है, जब माले का लाल झंडा गाड़ दूसरे की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया जाता था। आज बिहार में सुशासन की सरकार है और सुशासन की सरकार में लाल झंडा गाड़ने वाला हाथ शरीर से अलग हो जाएगा। उक्त बातें बुधवार को भाजपा नेता सह बक्सर के चर्चित व्यवसायी प्रदीप राय ने प्रेस वार्ता के दौरान कही।
-- भाजपा नेता सह व्यवसायी प्रदीप राय ने डुमरांव के पूर्व विधायक द्वारा लगाए आरोपो पर दी खुली चुनौती, प्रेस वार्ता कर रखा अपना पक्ष
-- बोले प्रदीप राय पूर्व विधायक की है हिम्मत तो मीडिया के सामने बैठ करे कागजातों की जांच
केटी न्यूज/बक्सर
यह 1990 का दौर नहीं है, जब माले का लाल झंडा गाड़ दूसरे की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया जाता था। आज बिहार में सुशासन की सरकार है और सुशासन की सरकार में लाल झंडा गाड़ने वाला हाथ शरीर से अलग हो जाएगा। उक्त बातें बुधवार को भाजपा नेता सह बक्सर के चर्चित व्यवसायी प्रदीप राय ने प्रेस वार्ता के दौरान कही। वे डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार सिंह द्वारा अपने उपर लगाए गए जमीन हड़पने के आरोपो का प्रेस वार्ता के माध्यम से जबाव दे रहे थे।

-- भूमि खरीद-बिक्री से लेकर कब्जे तक सब कुछ वैधानिक, सभी दस्तावेज और न्यायिक आदेश मौजूद
डुमरांव के पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर प्रेस वार्ता के दौरान वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन प्रदीप कुमार राय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यहीन हैं, जिनका उद्देश्य केवल जनता को गुमराह करना और राजनीतिक लाभ लेना है। प्रदीप राय ने कहा कि उनके पास भूमि से संबंधित सभी वैधानिक दस्तावेज, सरकारी अभिलेख और न्यायिक आदेश मौजूद हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि पूरा लेन-देन और कब्जा कानून के दायरे में है।

प्रदीप राय ने भूमि से जुड़े पूरे घटनाक्रम को तथ्यों के साथ सामने रखते हुए बताया कि दिनांक 25 मई 2011 को विधिवत निबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के माध्यम से सुदामा उपाध्याय, ललन उपाध्याय, विजय कुमार उपाध्याय और उनकी माता शिवपुजनी देवी ने अपने पैतृक खाता एवं प्लॉट की भूमि की बिक्री का अधिकार अखिलेश राय को दिया था। यह मुख्तारनामा रजिस्ट्री कार्यालय, बक्सर में विधिवत निबंधित है, जिसमें भूमि का कुल रकबा, खाता और प्लॉट संख्या स्पष्ट रूप से अंकित है। ये सभी विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिन्हें कोई भी सत्यापित कर सकता है।

-- पॉवर ऑफ अटार्नी के आधार पर हुई थी जमीन की बिक्री
प्रदीप राय ने बताया कि मुख्तारनामा के आधार पर 7 जून 2011 को अखिलेश राय द्वारा प्रदीप राय के पक्ष में विधिवत कबाला किया गया। इस कबाले के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की गई और नामांतरण पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ। इसके बाद 4 नवंबर 2016 को प्रदीप राय के नाम दूसरा कबाला भी हुआ, जिसका भी नियमानुसार दाखिल-खारिज किया गया। इस प्रकार कुल रकबा का समायोजन पूरी तरह नियमों के अनुसार किया गया है। प्रदीप राय ने साफ कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, फर्जीवाड़ा या छल की कोई गुंजाइश नहीं है।हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी प्रदीप राय ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। यदि किसी को संदेह है तो वे फॉरेंसिक जांच करवा सकते हैं। सभी संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान विधिवत दस्तावेजों और अभिलेखों में सुरक्षित हैं।

-- भूमि से संबंधित कई न्यायिक व प्रशासनिक आदेश है मौजूद
उन्होंने बताया कि इस भूमि से जुड़े कई न्यायिक और प्रशासनिक आदेश भी उनके पक्ष में हैं। दाखिल-खारिज अपील वाद संख्या 114/2021-22 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित किया जा चुका है। इसी तरह पनरीक्षण वाद संख्या 143/2022-23 (एडीएम कोर्ट) में भी आदेश उपलब्ध है। धारा 144 के तहत अनुमंडल अधिकारी, बक्सर का आदेश दिनांक 31 जनवरी 2025 भी रिकॉर्ड पर है। इसके अलावा टी.एस. संख्या 390/2021 (सिविल जज सीनियर डिवीजन) में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि विवादित भूमि पर कब्जा पहले से है।

प्रदीप राय ने यह भी स्पष्ट किया कि कम्प्लेंट केस संख्या 331/2023 (यूएमएफसी बक्सर) में अभी केवल पक्षकारों की उपस्थिति के लिए समन जारी हुआ है। उनके खिलाफ न तो कोई दोषसिद्धि हुई है और न ही कोई दंडात्मक आदेश पारित किया गया है।रजनीकांत उपाध्याय द्वारा लगाए गए आरोपों को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में टाइटल सूट संख्या 382/2020 सिविल कोर्ट, बक्सर में विचाराधीन है, जिसमें कुल 13 लोग पक्षकार हैं। इस मामले में न तो सुनवाई पूरी हुई है, न गवाही हुई है और न ही कोई अंतिम आदेश आया है। ऐसे में किसी को दोषी ठहराना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
-- राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है आरोप
अंत में प्रदीप राय ने कहा कि पूर्व विधायक और कुछ अन्य लोगों द्वारा लगाए गए सभी आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। उन्होंने मीडिया और आम जनता से अपील की कि वे किसी भी भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें और तथ्यों व दस्तावेजों के आधार पर ही सच्चाई को परखें।
