चौसा कस्तूरबा कांड: प्रशासन सख्त, छह पर कार्रवाई, कई सवाल अब भी जिंदा

चौसा प्रखंड के बनारपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 13 वर्षीय मूक-बधिर छात्रा की मौत ने जिले की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद उठे जनाक्रोश और जांच रिपोर्ट के सामने आते ही जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। लापरवाही के आरोप में छह कर्मियों पर गाज गिरी है, जबकि विद्यालय के शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी निभा रहे प्रधानाध्यापक सह संचालक को निलंबित किया गया है। कार्रवाई तेज है, लेकिन सवाल उससे भी बड़े हैं क्या यह त्रासदी टाली जा सकती थी।

चौसा कस्तूरबा कांड: प्रशासन सख्त, छह पर कार्रवाई, कई सवाल अब भी जिंदा

-- मूक-बधिर छात्रा की मौत ने उजागर की आवासीय विद्यालयों की हकीकत, प्रशासन की सख्ती के बीच जवाबदेही की परीक्षा

केटी न्यूज/चौसा

चौसा प्रखंड के बनारपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में 13 वर्षीय मूक-बधिर छात्रा की मौत ने जिले की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के बाद उठे जनाक्रोश और जांच रिपोर्ट के सामने आते ही जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। लापरवाही के आरोप में छह कर्मियों पर गाज गिरी है, जबकि विद्यालय के शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी निभा रहे प्रधानाध्यापक सह संचालक को निलंबित किया गया है। कार्रवाई तेज है, लेकिन सवाल उससे भी बड़े हैं क्या यह त्रासदी टाली जा सकती थी।

जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई संयुक्त जांच में साफ हुआ कि छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद विद्यालय में न तो नियमित स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था थी, न आपात स्थिति से निपटने का कोई प्रभावी प्रोटोकॉल। जांच रिपोर्ट के आधार पर केयर टेकर किरण कुमारी, वार्डन लक्ष्मी कुमारी, रसोइया आशा देवी और हीरा देवी, तथा रात्रि प्रहरी मुन्ना सिंह को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया है। वहीं, मध्य विद्यालय बनारपुर के प्रधानाध्यापक-सह-कस्तूरबा विद्यालय संचालक अतहर परवेज को निलंबित किया गया है।प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हृषिकेश कुमार सिंह के अनुसार, घटना के तुरंत बाद केयर टेकर के विरुद्ध मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी चंदन द्विवेदी की संयुक्त जांच ने विद्यालय की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर कींकृदवाओं की उपलब्धता, समय पर चिकित्सकीय संपर्क और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण में चूक सामने आई। इन्हीं निष्कर्षों पर जिलाधिकारी सहिला ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलती, तो जान बचाई जा सकती थी।आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली विशेष आवश्यकता वाली छात्राओं के लिए अतिरिक्त सावधानी और प्रशिक्षित देखरेख अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में व्यवस्था कागजों तक सिमटी दिखी।

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई संदेश हैकृबच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे और कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। साथ ही, सभी आवासीय विद्यालयों में स्वास्थ्य प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और निगरानी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।कस्तूरबा कांड केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की कसौटी है। कार्रवाई हुई है, पर असली परीक्षा अब है, क्या यह सुधारों में बदलेगी, या फिर अगली चेतावनी तक सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा।