निजी जमीन पर बना दिया 17.70 लाख का सरकारी सामुदायिक भवन, जांच में खुलासा

सिमरी प्रखंड के राजपुर कला पंचायत अंतर्गत दादा-बाबा के डेरा (मदिल चौधरी के घर के समीप) में सरकारी राशि से बने सामुदायिक भवन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। चार सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि करीब 17 लाख 70 हजार रुपये की लागत से बना सामुदायिक भवन निजी भूमि पर निर्मित है।

निजी जमीन पर बना दिया 17.70 लाख का सरकारी सामुदायिक भवन, जांच में खुलासा

__ चार सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, खाता-खेसरा जांच में भूमि निकली निजी; डीएम ने दोषियों पर कार्रवाई के दिए संकेत

केटी न्यूज/बक्सर।

सिमरी प्रखंड के राजपुर कला पंचायत अंतर्गत दादा-बाबा के डेरा (मदिल चौधरी के घर के समीप) में सरकारी राशि से बने सामुदायिक भवन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। चार सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि करीब 17 लाख 70 हजार रुपये की लागत से बना सामुदायिक भवन निजी भूमि पर निर्मित है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।मामला सामने आने के बाद बड़का राजपुर गांव निवासी सत्यानंद मिश्रा ने जिलाधिकारी साहिला को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की थी। आवेदन में आरोप लगाया गया था कि सरकारी राशि से निर्मित यह सामुदायिक भवन सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

आवेदक ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज भी प्रशासन को उपलब्ध कराए थे। दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2013-14 में बीआरसीएफ योजना के तहत राजपुर कला पंचायत के दादा-बाबा के डेरा में सामुदायिक भवन निर्माण कराया गया था। इसके निर्माण पर 6 लाख 35 हजार रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2015-16 में बीआरजीएफ योजना से भवन परिसर की घेराबंदी कराई गई, जिस पर 5 लाख 10 हजार रुपये खर्च हुए। वहीं वित्तीय वर्ष 2018-19 में एमएलसी मद से भवन के प्रथम तल का निर्माण कराया गया, जिस पर 6 लाख 25 हजार रुपये खर्च किए गए।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था। टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने अभिलेखों को जुटाना था।

जांच टीम ने जिला परिषद कार्यालय और सिमरी अंचल कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की। योजनाओं में खर्च की गई राशि से जुड़े रिकॉर्ड तो मिले, लेकिन जमीन से संबंधित जानकारी नहीं मिल पा रही थी।बाद में योजना विभाग के कार्यालय से भूमि से जुड़े खाता-खेसरा का विवरण प्राप्त किया गया। इसके बाद अंचल कार्यालय से इसकी जांच कराई गई, जिसमें संबंधित जमीन निजी होने की पुष्टि हुई। जांच टीम ने इसी आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी।अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि निजी भूमि पर सरकारी राशि से निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई। पहली बार जिला परिषद की योजना से भवन निर्माण हुआ और बाद में एमएलसी फंड से प्रथम तल भी बना दिया गया, लेकिन निर्माण से पहले भूमि की वैधता और आवश्यक अनुमति की जांच नहीं की गई।

कोट

"निजी भूमि पर सरकारी राशि से बने सामुदायिक भवन की जांच अभी चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"

— साहिला, जिलाधिकारी, बक्सर