चलते-चलते थम गई जिंदगी: डुमरांव स्टेशन परिसर में अधेड़ की अचानक मौत, शव से लिपट रो पड़े परिजन

डुमरांव रेलवे स्टेशन परिसर में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। रोज की तरह घर से निकला एक अधेड़ व्यक्ति कुछ ही घंटों बाद मृत अवस्था में मिला। चलते-चलते अचानक उसकी जिंदगी की डोर टूट गई और परिवार के सपने पलभर में बिखर गए।

चलते-चलते थम गई जिंदगी: डुमरांव स्टेशन परिसर में अधेड़ की अचानक मौत, शव से लिपट रो पड़े परिजन

--गिरधारी गली के हरेन्द्र चौधरी की पंच मंदिर के पास निर्माणाधीन भवन के गड्ढे में गिरने से मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव रेलवे स्टेशन परिसर में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। रोज की तरह घर से निकला एक अधेड़ व्यक्ति कुछ ही घंटों बाद मृत अवस्था में मिला। चलते-चलते अचानक उसकी जिंदगी की डोर टूट गई और परिवार के सपने पलभर में बिखर गए। घटना के बाद स्टेशन परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई और कुछ देर के लिए माहौल गमगीन हो गया।जानकारी के अनुसार, स्थानीय नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 स्थित गिरधारी गली निवासी स्व. जनक चौधरी के 55 वर्षीय पुत्र हरेन्द्र चौधरी उर्फ हंटर शनिवार दोपहर स्टेशन परिसर पहुंचे थे। पंच मंदिर के समीप अमृत भारत योजना के तहत रेलवे के निर्माणाधीन भवन के पास बने गड्ढे में वह अचानक गिर पड़े।

कुछ देर बाद जब लोगों की नजर पड़ी तो वह अचेत अवस्था में पड़े थे। आनन-फानन में इसकी सूचना डुमरांव थाना को दी गई, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।मृतक की पहचान होते ही पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया। परिजन भागते हुए स्टेशन पहुंचे और हरेन्द्र के शव को देखते ही उनके सब्र का बांध टूट गया। पत्नी दुर्गावती देवी पति के शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रोने लगीं। वहीं बेटी प्रीति कुमारी और पुत्र प्रकाश कुमार (14 वर्ष) तथा अभिषेक कुमार (16 वर्ष) का भी रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों की चीख-पुकार से पूरा स्टेशन परिसर गमगीन हो गया।

बताया जाता है कि हरेन्द्र चौधरी पहले चापाकल मिस्त्री का काम करते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से काम मंदा पड़ने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। मजबूरी में वह कचरा चुनकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। शनिवार सुबह भी वह नाश्ता कर घर से निकले थे, लेकिन किसी को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा साबित होगी।घटना को लेकर लोगों का कहना है कि हरेन्द्र मंदिर की ओर से पैदल चलते हुए स्टेशन की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह गड्ढे में गिर गए। प्राथमिक जांच में उनके शरीर पर किसी प्रकार के चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि तेज गर्मी, अचानक तबीयत खराब होने या हार्ट अटैक के कारण उनकी मौत हुई होगी।

डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्टेशन परिसर में अधेड़ की अचानक मौत की सूचना मिली थी। परिजन शव अपने साथ ले गए हैं। उन्होंने बताया कि परिजनों ने किसी प्रकार की आशंका जाहिर नहीं की है। वहीं, पोस्टमार्टम कराने को लेकर भी परिजन तैयार नहीं थे।इस घटना से मृतक के अबोध बच्चों के सर से बाप का साया और दो वक्त की रोटी का सहारा भी छिन गया है।एक गरीब परिवार का सहारा यूं अचानक छिन जाने से गिरधारी गली में भी मातम पसरा हुआ है। हरेन्द्र की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिंदगी की राह पर चलते इंसान को कब कौन सा मोड़ आखिरी साबित हो जाए, यह किसी को पता नहीं होता।