आधी रात की गिरफ्तारी से भड़का बनारपुर, फायरिंग केस में पुलिस कार्रवाई पर सड़कों पर उतरे ग्रामीण

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बनारपुर गांव में ठेकेदारी विवाद को लेकर हुई मारपीट और फायरिंग की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में पुलिस द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार की सुबह आक्रोशित लोगों ने चौसा–मोहनिया मुख्य मार्ग को जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

आधी रात की गिरफ्तारी से भड़का बनारपुर, फायरिंग केस में पुलिस कार्रवाई पर सड़कों पर उतरे ग्रामीण

__ ठेकेदारी विवाद से शुरू हुई हिंसा ने लिया तूल, पुलिस पर पक्षपात और दबंगों को संरक्षण देने का आरोप

केटी न्यूज/चौसा

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बनारपुर गांव में ठेकेदारी विवाद को लेकर हुई मारपीट और फायरिंग की घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में पुलिस द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार की सुबह आक्रोशित लोगों ने चौसा–मोहनिया मुख्य मार्ग को जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।दरअसल, मंगलवार की दोपहर बनारपुर में पूर्व के ठेकेदारी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई थी, जो बाद में फायरिंग तक पहुंच गई। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक पक्ष से आलोक तिवारी को गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बुधवार की देर रात बिना किसी पूर्व सूचना के आलोक तिवारी के घर पर धावा बोला। इस दौरान दरवाजे और खिड़कियां तोड़कर घर में घुसा गया, जिससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून और प्रक्रिया के खिलाफ है।प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बनारपुर गांव के साथ प्रशासन का रवैया हमेशा से कठोर रहा है। उनका आरोप है कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी पुलिस गांव में घुसकर तोड़फोड़ करती है और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।

गांव के किसान मुन्ना तिवारी ने आरोप लगाया कि पुलिस केवल कमजोर वर्ग और किसानों पर ही सख्ती दिखाती है, जबकि प्रभावशाली और दबंग लोगों के खिलाफ नरमी बरती जाती है। उन्होंने आनंद राय पर अवैध खनन और मिट्टी ढुलाई जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध करने पर खुलेआम गोलीबारी की जाती है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह जांच वरीय अधिकारियों की निगरानी में हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।

सड़क जाम के कारण चौसा–मोहनिया मार्ग पर यातायात काफी देर तक बाधित रहा, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई।वहीं, पुलिस प्रशासन ने अपने पक्ष में सफाई देते हुए कहा कि फायरिंग की घटना में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई है और उसी आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से जारी है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।हालांकि, शाम पांच बजे के बाद पुलिस के समझाने के बाद आक्रोशित लोगों ने जाम हटाया, इसके बाद ही परिचालन बहाल हो सका।