नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला, सहकारिता मंत्री ने लिया संज्ञान, जांच के दिए आदेश

नया भोजपुर थानाक्षेत्र के डुमरी रोड स्थित पैक्स संचालित जमावृद्धि योजना से जुड़ा मामला अब सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सहकारिता व्यवस्था पर गंभीर सवाल बनकर उभरा है। छोटे कारोबारियों और ठेला-खोमचा लगाने वालों की वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई पूंजी आज निकासी के लिए तरस रही है, जबकि जिम्मेदार तंत्र खामोश नजर आ रहा है।

नया भोजपुर पैक्स बैंक घोटाला, सहकारिता मंत्री ने लिया संज्ञान, जांच के दिए आदेश

केटी न्यूज/डुमरांव 

नया भोजपुर थानाक्षेत्र के डुमरी रोड स्थित पैक्स संचालित जमावृद्धि योजना से जुड़ा मामला अब सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि सहकारिता व्यवस्था पर गंभीर सवाल बनकर उभरा है। छोटे कारोबारियों और ठेला-खोमचा लगाने वालों की वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई पूंजी आज निकासी के लिए तरस रही है, जबकि जिम्मेदार तंत्र खामोश नजर आ रहा है।मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियां, पटना प्रमंडल संतोष कुमार झा ने जिला सहकारिता पदाधिकारी को पत्रांक 49, दिनांक 06/01/2026 के तहत गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह कार्रवाई सहकारिता मंत्री के आप्त सचिव द्वारा केशव टाइम्स में प्रकाशित खबर के संज्ञान के बाद की गई है, जिससे साफ है कि मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच चुका है।सोमवार को नया भोजपुर थाना परिसर में आयोजित एसपी के जनता दरबार में लगभग दो दर्जन पीड़ित जमाकर्ता अपने-अपने दस्तावेज लेकर पहुंचे। पीड़ितों का आरोप है कि नया भोजपुर सब्जी मंडी से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाने वाले छोटे व्यापारियों से एजेंटों के माध्यम से लाखों रुपये जमा कराए गए। भरोसे की यह कमाई पैक्स की जमावृद्धि योजना में लगाई गई, लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा।

स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब संबंधित एजेंट ने फोन उठाना बंद कर दिया और कई बार बैंक बंद मिला। जमाकर्ताओं के अनुसार, इस पैक्स बैंक में करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। बताया जा रहा है कि यह जिले का एकमात्र ऐसा पैक्स बैंक है, जिसका संचालन सीधे पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक द्वारा किया जाता है, जिससे निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।पीड़ितों में रिंकू कुरैशी के 53 हजार, गुड़िया कुमारी के 40 हजार, शमशाद कुरैशी के 50 हजार और गोरख प्रसाद के 9 हजार रुपये सहित दर्जनों लोगों की जमा पूंजी फंसी है।

कई जमाकर्ताओं ने फिक्स्ड डिपॉजिट भी करा रखी है। जब भी निकासी की मांग होती है, कभी फंड की कमी तो कभी अगले सप्ताह का झांसा देकर लौटा दिया जाता है।पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की आजीविका का सवाल है। अब देखना यह है कि जांच के बाद सहकारिता विभाग दोषियों पर कितनी सख्ती दिखाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।