ओमान में कामगार की मौत: ‘रोजगार की मजबूरी’ बनी त्रासदी, 14 दिन बाद गांव पहुंचा शव

डुमरांव थाना क्षेत्र के नंदन गांव में शनिवार का दिन मातम में बदल गया, जब ओमान में काम करने गए एक युवक का शव 14 दिनों बाद उसके पैतृक घर पहुंचा। बेहतर भविष्य और रोज़गार की उम्मीद में विदेश गए सुमन कुमार पाल की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

ओमान में कामगार की मौत: ‘रोजगार की मजबूरी’ बनी त्रासदी, 14 दिन बाद गांव पहुंचा शव

__ विदेश में बेहतर भविष्य की तलाश में गया युवक नहीं लौटा जिंदा, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सुरक्षा पर उठे सवाल

केटी न्यूज/डुमरांव:

डुमरांव थाना क्षेत्र के नंदन गांव में शनिवार का दिन मातम में बदल गया, जब ओमान में काम करने गए एक युवक का शव 14 दिनों बाद उसके पैतृक घर पहुंचा। बेहतर भविष्य और रोज़गार की उम्मीद में विदेश गए सुमन कुमार पाल की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।मिली जानकारी के अनुसार, सुमन कुमार पाल 21 मार्च को काम के दौरान अचानक पेट में तेज दर्द से परेशान हो गए थे। कंपनी के लोग उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद परिजनों को सूचना तो मिल गई, लेकिन शव को गांव पहुंचने में दो सप्ताह लग गए। इस दौरान परिवार हर दिन उम्मीद और बेचैनी के बीच झूलता रहा।शनिवार सुबह जैसे ही शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घर के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। पत्नी गुड़िया देवी पति के पार्थिव शरीर को देखते ही बेसुध हो गईं, वहीं 11 वर्षीय पुत्र गोपी कुमार और बेटियां परिधि व अंशिका के सिर से पिता का साया उठने का दर्द साफ झलक रहा था।परिजनों ने बताया कि सुमन करीब चार साल पहले ओमान गए थे और इस दौरान एक बार भी घर नहीं लौट पाए।

परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां उठाने के लिए उन्होंने यह कठिन रास्ता चुना था, लेकिन उनकी यह कोशिश अधूरी ही रह गई।ग्रामीणों के अनुसार, सुमन मिलनसार और मेहनती युवक थे, जो परिवार के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनकी असमय मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही, विदेशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।