तीन साल से आदेश ठंडे बस्ते में: शिक्षा विभाग में ‘मनमानी बनाम न्याय’ की जंग

बक्सर शिक्षा विभाग में जवाबदेही की पोल खोलने वाला एक सनसनीखेज मामला फिर सतह पर आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि तत्कालीन डीडीसी, सदर एसडीएम और जिला लोक शिकायत निवारण अधिकारी जैसे वरीय अधिकारियों के स्पष्ट आदेश को पिछले तीन वर्षों से खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है।

तीन साल से आदेश ठंडे बस्ते में: शिक्षा विभाग में ‘मनमानी बनाम न्याय’ की जंग

केटी न्यूज/बक्सर।

बक्सर शिक्षा विभाग में जवाबदेही की पोल खोलने वाला एक सनसनीखेज मामला फिर सतह पर आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि तत्कालीन डीडीसी, सदर एसडीएम और जिला लोक शिकायत निवारण अधिकारी जैसे वरीय अधिकारियों के स्पष्ट आदेश को पिछले तीन वर्षों से खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। दोषी पाए गए प्रधानाध्यापक और शिक्षक पर कार्रवाई के बजाय फाइलों को दबाकर रखने का खेल चलता रहा।

मामला सदर प्रखंड के सारिमपुर ऊर्दू मध्य विद्यालय से जुड़ा है, जहां प्रधानाध्यापक कमला प्रसाद और शिक्षक अमित चौधरी ने अक्टूबर 2020 में तत्कालीन अनुमंडल कर्मी मनीष चंद्र पर विद्यालय में आकर गाली-गलौज करने का आरोप लगाया था। आरोप गंभीर थे, लेकिन जब जांच हुई तो तस्वीर बिल्कुल उलट निकली। तत्कालीन डीडीसी और सदर एसडीएम द्वारा की गई जांच में ग्रामीणों के बयान और दस्तावेजों के आधार पर यह साफ हुआ कि आरोप पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत थे। इसके बाद जनवरी 2023 में दोनों वरीय अधिकारियों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को पत्र भेजकर प्रधानाध्यापक और शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। मामला जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय तक पहुंचा, जहां से भी दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश हुआ।

इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने न तो प्रधानाध्यापक पर कोई कार्रवाई की और न ही आदेश का पालन किया। पीड़ित का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर मामले को दबाया और दोषियों को संरक्षण दिया। हैरानी की बात यह है कि तीन साल बाद अब सिर्फ शिक्षक अमित चौधरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि प्रधानाध्यापक अब भी कार्रवाई से बाहर हैं।

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेशों की अवहेलना, चयनात्मक कार्रवाई और दोषियों को बचाने का आरोप अब विभाग के गले की हड्डी बनता जा रहा है। वहीं डीईओ संदीप रंजन ने स्वीकार किया कि मामला गंभीर है और पूर्व में आदेशों का पालन नहीं हुआ होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब पूरे मामले की समीक्षा कर वरीय अधिकारियों के आदेश का अनुपालन किया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या तीन साल बाद न्याय की गाड़ी चलेगी या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।