चार जवानों का हत्यारोपित बना निजी गार्ड, अब पूर्व सैनिक अतुल की हत्या ने उठाए बड़े सवाल
झारखंड के चतरा में पुराना भोजपुर निवासी पूर्व सैनिक अतुल कुमार सैनी की हत्या ने निजी सुरक्षा एजेंसियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हत्या का आरोपी बलविंदर सिंह उर्फ बलवीर वही व्यक्ति निकला, जिस पर वर्ष 2017 में सीआईएसएफ के चार जवानों की हत्या का आरोप लग चुका है और जिसे सेवा से बर्खास्त भी किया गया था।

__ मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे आरोपी ने चतरा में सहकर्मी को मारी गोली; निजी सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति प्रक्रिया और सत्यापन पर उठे सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव
झारखंड के चतरा में पुराना भोजपुर निवासी पूर्व सैनिक अतुल कुमार सैनी की हत्या ने निजी सुरक्षा एजेंसियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हत्या का आरोपी बलविंदर सिंह उर्फ बलवीर वही व्यक्ति निकला, जिस पर वर्ष 2017 में सीआईएसएफ के चार जवानों की हत्या का आरोप लग चुका है और जिसे सेवा से बर्खास्त भी किया गया था। इसके बावजूद वह निजी अंगरक्षक के रूप में कार्यरत था।मंगलवार को बेलागंज विधायक मनोरमा देवी के पुत्र विनीत कुमार यादव उर्फ रॉकी यादव चतरा एसपी से मिलने पहुंचे थे। उनके साथ दो निजी सुरक्षाकर्मी अतुल कुमार सैनी और बलवीर के अलावा एक सरकारी गार्ड भी मौजूद था। एसपी कार्यालय के बाहर इंतजार के दौरान दोनों निजी गार्डों के बीच मामूली कहासुनी हुई, जो देखते-देखते हिंसक हो गई। आरोप है कि बलवीर ने अतुल पर गोली चला दी।

पहली गोली चूक गई, जबकि दूसरी गोली लगने से अतुल की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल से गिरफ्तार कर हथियार जब्त कर लिया।जांच में सामने आया कि आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसके पास उपचार से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इतने गंभीर आपराधिक इतिहास और मानसिक स्थिति के बावजूद उसे निजी सुरक्षा एजेंसी में नौकरी कैसे मिली। इस मामले में रॉकी यादव, वाहन चालक समेत कई लोगों से पूछताछ की जा रही है।मृतक अतुल कुमार सैनी पहले असम राइफल्स में सेवा दे चुके थे। बाद में उन्होंने पीएमसीएच में सुरक्षा कर्मी के रूप में काम किया और फिर निजी सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यभार संभाला।

वर्ष 2023 में नॉर्थईस्ट एक्सप्रेस दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्होंने नौकरी बदल ली थी। उनके परिवार में पत्नी, चार वर्षीय पुत्री, पिता, दो भाई और एक बहन हैं। उनकी दिवंगत मां ऊषा देवी वर्ष 2006 से 2011 तक पुराना भोजपुर पंचायत की सरपंच रह चुकी थीं।बुधवार को जब अतुल का शव पैतृक गांव पुराना भोजपुर पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अब यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि निजी सुरक्षा व्यवस्था में सत्यापन और निगरानी की गंभीर खामियों पर भी बड़ा सवाल बन गया है।

