पूर्वी रेलवे गुमटी पर फूटा जनाक्रोश, समाधान नहीं तो आर-पार की लड़ाई

पूर्वी रेलवे गुमटी लंबे समय से बंद रहने से नाराज स्थानीय लोगों का सब्र आखिरकार सोमवार को टूट गया। जिला दलित अति पिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुमटी के समीप अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। संगठन के जिला संयोजक सरोज राजभर के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लेकर प्रशासन और रेलवे के खिलाफ नाराजगी जताई तथा गुमटी खुलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

पूर्वी रेलवे गुमटी पर फूटा जनाक्रोश, समाधान नहीं तो आर-पार की लड़ाई

__ प्रशासन और रेलवे पर वादाखिलाफी का आरोप, अनिश्चितकालीन धरना शुरू; गुमटी खुलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

केटी न्यूज/बक्सर। 

पूर्वी रेलवे गुमटी लंबे समय से बंद रहने से नाराज स्थानीय लोगों का सब्र आखिरकार सोमवार को टूट गया। जिला दलित अति पिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुमटी के समीप अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया। संगठन के जिला संयोजक सरोज राजभर के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लेकर प्रशासन और रेलवे के खिलाफ नाराजगी जताई तथा गुमटी खुलने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।धरनास्थल पर वक्ताओं ने कहा कि पूर्वी रेलवे गुमटी बंद रहने से हजारों लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो गया है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों और बुजुर्गों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

इससे लोगों का समय बर्बाद होने के साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत और मांग के बावजूद प्रशासन ने समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं की।जिला संयोजक सरोज राजभर ने कहा कि छह जुलाई को जिला प्रशासन और रेलवे प्रशासन को आंदोलन की पूर्व सूचना दी गई थी। अधिकारियों के अनुरोध पर कुछ दिनों का समय देते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी गुमटी खोलने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की इसी उदासीनता के विरोध में अब अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की बुनियादी सुविधा और अधिकार की लड़ाई है। यदि जल्द ही गुमटी चालू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर रेल चक्का जाम सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और रेलवे की होगी।धरने में राम चीज प्रजापति, कृष्णावती देवी, जेपी यादव, रमाकांत चंद्रवंशी, राम इकबाल ठाकुर, मुन्ना ओझा, अजीत सिंह, लाल बिहारी, सुनीता देवी, राष्ट्रपति राय, अजीत कुमार, सिपाही, बीरबल रजक और गुड्डू शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पूर्वी रेलवे गुमटी खुलने तक आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।