नए वित्तीय वर्ष में पुरानी रसीदों से वसूली, चौसा नगर पंचायत पर उठे सवाल

नगर पंचायत चौसा में सैरात वसूली को लेकर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही विवाद गहराता नजर आ रहा है। स्थानीय व्यवसायियों और वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी करते हुए पुराने सत्र की रसीदों के आधार पर वसूली की जा रही है, जिससे पूरे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

नए वित्तीय वर्ष में पुरानी रसीदों से वसूली, चौसा नगर पंचायत पर उठे सवाल

__ सैरात बंदोबस्ती लंबित, विभागीय निगरानी में हो रही उगाही पर पारदर्शिता को लेकर बढ़ा असंतोष

केटी न्यूज/चौसा

नगर पंचायत चौसा में सैरात वसूली को लेकर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही विवाद गहराता नजर आ रहा है। स्थानीय व्यवसायियों और वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी करते हुए पुराने सत्र की रसीदों के आधार पर वसूली की जा रही है, जिससे पूरे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।बताया जाता है कि नगर पंचायत क्षेत्र में अभी तक सैरात की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है। ऐसे में वसूली की जिम्मेदारी फिलहाल विभाग के पास है, जो अपने स्तर से कर्मियों को नियुक्त कर उगाही करवा रहा है।

हालांकि, 31 मार्च को वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त हो चुका है और 1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत हो गई है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर पुराने सत्र की पर्चियों का इस्तेमाल जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना नए सत्र की वैध रसीद के वसूली करना नियमों के खिलाफ है। इससे यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वसूली गई राशि किस खाते में जमा हो रही है और उसका लेखा-जोखा कैसे रखा जा रहा है। इस स्थिति ने लोगों में असमंजस के साथ-साथ आक्रोश भी पैदा कर दिया है।व्यवसायियों का आरोप है कि यदि वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तो इससे राजस्व के दुरुपयोग की आशंका बढ़ेगी।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सैरात की विधिवत बंदोबस्ती कराई जाए और फिलहाल की जा रही वसूली पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।इस संबंध में नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने कहा कि सभी वसूली कर्मियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि केवल नए सत्र की रसीदों पर ही वसूली की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने पर्चियों के उपयोग की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद यदि कहीं ऐसी शिकायत मिलती है, तो उसे गंभीरता से लेते हुए जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, इस पूरे मामले ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।