मानकों से खिलवाड़: बक्सर-कोईलवर तटबंध की मरम्मत में रेत की जगह डाली जा रही है मिट्टी भरी बोरियां

करीब 28 किलोमीटर लंबे बक्सर-कोइलवर तटबंध पर चल रहे सड़क निर्माण और कटाव रोधक कार्य को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए खुला विरोध शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि जिस परियोजना को क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा और विकास की नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसी में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।

मानकों से खिलवाड़: बक्सर-कोईलवर तटबंध की मरम्मत में रेत की जगह डाली जा रही है मिट्टी भरी बोरियां

-- बक्सर-कोइलवर तटबंध परियोजना में मानक से खिलवाड़ पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जांच के आदेश के बाद भी उठे सवाल

केटी न्यूज/बक्सर

करीब 28 किलोमीटर लंबे बक्सर-कोइलवर तटबंध पर चल रहे सड़क निर्माण और कटाव रोधक कार्य को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए खुला विरोध शुरू कर दिया है। उनका दावा है कि जिस परियोजना को क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा और विकास की नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, उसी में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।ग्रामीणों के अनुसार, तटबंध को मजबूत करने के लिए नदी किनारे बोरी में बालू भरकर लगाने का प्रावधान है, ताकि जलधारा के दबाव से होने वाले कटाव को रोका जा सके। लेकिन मौके पर कार्य एजेंसी द्वारा बालू की जगह मिट्टी भरकर बोरी लगाने का काम किया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि मिट्टी भरी बोरियां पानी के संपर्क में आते ही बह सकती हैं या दबाव में टूट सकती हैं, जिससे तटबंध की मजबूती कमजोर पड़ जाएगी।स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सिर्फ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि लागत बचाने के नाम पर किया जा रहा समझौता है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना में यदि गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर समय रहते स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान बक्सर पहुंचकर इस परियोजना का शिलान्यास किया था।

यह योजना बक्सर से कोइलवर तक तटबंध को सुदृढ़ करने और उस पर सड़क निर्माण के जरिए क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए इसे एक बड़ी राहत परियोजना के रूप में देखा जा रहा था।लेकिन अब जमीनी हकीकत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती चरण में ही मानकों की अनदेखी हो रही है, तो भविष्य में परियोजना की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा। लोगों ने मांग की है कि उच्च स्तरीय तकनीकी टीम गठित कर निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए।वहीं दूसरी ओर बाढ़ नियंत्रण विभाग ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह से निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है।उनका दावा है कि कार्य एजेंसी को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं और समय-समय पर निरीक्षण भी किया जा रहा है।इस संबंध में बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता कन्हैया लाल ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी या कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि सवाल यह है कि क्या जांच महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी। बक्सर-कोइलवर तटबंध परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और भरोसे से जुड़ा मामला है। ऐसे में गुणवत्ता पर किसी भी प्रकार का समझौता न केवल प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी, बल्कि यह जनहित के साथ खिलवाड़ भी होगा।अब सबकी निगाहें प्रस्तावित जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।