धरातल पर नहीं लगा बोर्ड, फिर कैसे हुआ भुगतान, रामपुर पंचायत में गड़बड़ी का आरोप

प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत दसियाव गांव में 15वीं वित्त आयोग मद की राशि से वर्ष 2024-25 में कराए गए नाली एवं स्लैब निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। यह निर्माण कार्य बिपुल दुबे के घर से पोखरा बांध तक कराया गया, जिसकी योजना संख्या 121072341 बताई जा रही है। योजना की प्राक्कलित राशि 2 लाख 78 हजार 200 रुपये है।

धरातल पर नहीं लगा बोर्ड, फिर कैसे हुआ भुगतान, रामपुर पंचायत में गड़बड़ी का आरोप

केटी न्यूज/केसठ। 

प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत दसियाव गांव में 15वीं वित्त आयोग मद की राशि से वर्ष 2024-25 में कराए गए नाली एवं स्लैब निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। यह निर्माण कार्य बिपुल दुबे के घर से पोखरा बांध तक कराया गया, जिसकी योजना संख्या 121072341 बताई जा रही है। योजना की प्राक्कलित राशि 2 लाख 78 हजार 200 रुपये है।ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के तहत लगाए जाने वाले अनिवार्य साइन बोर्ड को स्थल पर स्थापित ही नहीं किया गया। नियमानुसार किसी भी विकास योजना के प्रारंभ से पूर्व संबंधित स्थल पर साइन बोर्ड लगाना आवश्यक होता है, जिसमें योजना की लागत, कार्य अवधि और कार्यान्वयन एजेंसी का विवरण अंकित रहता है।प्रति साइन बोर्ड लगभग पांच हजार रुपये खर्च का प्रावधान है। संबंधित योजना में साइन बोर्ड मद में 4 हजार 237 रुपये भुगतान दर्शाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि धरातल पर बोर्ड दिखाई नहीं देता, जबकि विभागीय पोर्टल पर जियो टैग की गई तस्वीर अपलोड की गई है। आरोप है कि वास्तविक बोर्ड लगाने के बजाय फोटोशॉप से तैयार की गई तस्वीर को जियो टैग कर अपलोड कर दिया गया।स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब साइन बोर्ड लगाया ही नहीं गया, तो भुगतान किस आधार पर किया गया और जियो टैगिंग कैसे संभव हुई। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।इस संबंध में पंचायत प्रतिनिधियों या संबंधित पदाधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला हो सकता है।

-- फोटो शॉप का उपयोग कर बनाया गया बोर्ड तकनीक सहायक ने किया जिओ टैग

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना स्थल पर वास्तविक साइन बोर्ड लगाए बिना ही फोटोशॉप के माध्यम से तैयार की गई बोर्ड की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड कर दी गई। बताया जा रहा है कि उक्त तस्वीर को तकनीक सहायक द्वारा जियो टैग कर ऑनलाइन प्रविष्टि पूरी कर दी गई, जिसके आधार पर साइन बोर्ड मद की राशि का भुगतान दर्शा दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि बिना स्थल पर भौतिक सत्यापन के जियो टैगिंग कैसे की गई और भुगतान की प्रक्रिया किस स्तर पर स्वीकृत हुई।