शहरी वंशावली की उलझन खत्म, अब अंचल कार्यालय बनेगा एकमात्र केंद्र
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए वंशावली को लेकर वर्षों से चली आ रही असमंजस की स्थिति पर आखिरकार विराम लग गया है। राज्य सरकार के ताजा प्रशासनिक निर्णय के बाद अब नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों के नागरिकों को वंशावली के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी आदेश के तहत शहरी क्षेत्रों में वंशावली जारी करने का अधिकार अंचलाधिकारियों को दे दिया गया है। यह व्यवस्था पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
-- राज्य सरकार के फैसले से जमीन-जायदाद और उत्तराधिकार मामलों में आएगी रफ्तार
केटी न्यूज/डुमरांव
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए वंशावली को लेकर वर्षों से चली आ रही असमंजस की स्थिति पर आखिरकार विराम लग गया है। राज्य सरकार के ताजा प्रशासनिक निर्णय के बाद अब नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों के नागरिकों को वंशावली के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी आदेश के तहत शहरी क्षेत्रों में वंशावली जारी करने का अधिकार अंचलाधिकारियों को दे दिया गया है। यह व्यवस्था पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

-- एक आदेश, कई समस्याओं का समाधान
अब तक ग्रामीण इलाकों में वंशावली सरपंच द्वारा जारी की जाती थी, जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग नगर निकाय और अंचल कार्यालयों के बीच उलझे रहते थे। इस भ्रम का सीधा असर जमीन, उत्तराधिकार, दाखिल-खारिज, बैंक ऋण, बीमा दावा और न्यायालयीन मामलों पर पड़ता था। कई मामलों में वर्षों तक प्रक्रिया अधर में लटकी रहती थी। नए आदेश ने इस प्रशासनिक खालीपन को भरते हुए साफ कर दिया है कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में वंशावली अब केवल अंचलाधिकारी ही जारी करेंगे।

-- अंचल कार्यालय से मिलेगी पारदर्शिता
राजस्व विभाग का मानना है कि अंचल स्तर से वंशावली जारी होने पर सत्यापन की प्रक्रिया अधिक मजबूत होगी। अंचलाधिकारी के पास खतियान, खेसरा, नक्शा और अन्य राजस्व अभिलेख पहले से उपलब्ध रहते हैं, जिससे पारिवारिक विवरण की जांच आसान और भरोसेमंद हो सकेगी। इससे न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि फर्जी दस्तावेजों पर भी प्रभावी रोक लगेगी। एक ही सक्षम अधिकारी के पास अधिकार होने से जवाबदेही तय होगी और नागरिकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

-- बक्सर जिले के शहरी नागरिकों को सीधी राहत
इस निर्णय से बक्सर जिले के बक्सर व डुमरांव नगर परिषद सहित चौसा, ब्रह्मपुर और इटाढ़ी नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इन इलाकों में जमीन और संपत्ति से जुड़े मामलों की संख्या अधिक है, जहां वंशावली की भूमिका अहम होती है। पहले दस्तावेज के अभाव में परिवारों को लंबे समय तक परेशान होना पड़ता था, अब उन्हें राहत की उम्मीद दिख रही है।

-- प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
यह फैसला राजस्व विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग के समन्वय का परिणाम है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट हैकृनागरिक सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाना। शहरी वंशावली को लेकर लिया गया यह निर्णय न सिर्फ प्रशासनिक सुधार का संकेत है, बल्कि आम लोगों के लिए एक बड़ी सुविधा भी साबित होगा।
