रिहायशी इलाके में वर्षों से चल रहा है पटाखा निर्माण व भंडारण का खेल
डुमरांव अनुमंडल व आस पास के क्षेत्र में अवैध तरीके से पटाखा निर्माण व भंडारण का खेल वर्षों से चल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन व पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। जब कही भी पटाखा के भंडारण व फैक्ट्री में विस्फोट होता है, तब यह खबर न सिर्फ सुर्खियां बनती है, बल्कि प्रशासन का ध्यान भी इस ओर आकृष्ट होता है तथा पूरे नेटवर्क को खंगालने के बजाय प्रशासन सिर्फ विस्फोट से संबंधित लोगों पर एफआईआर कर ही अपनी जिम्मेवारी पूरी कर लेता है।
-- पुलिस व प्रशासन के पास नहीं है रिकार्ड, तंग गलियों व घनी आबादी के बीच अवैध तरीके से पटाखा निर्माण व भंडारण से उठ रहे है सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव अनुमंडल व आस पास के क्षेत्र में अवैध तरीके से पटाखा निर्माण व भंडारण का खेल वर्षों से चल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन व पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है। जब कही भी पटाखा के भंडारण व फैक्ट्री में विस्फोट होता है, तब यह खबर न सिर्फ सुर्खियां बनती है, बल्कि प्रशासन का ध्यान भी इस ओर आकृष्ट होता है तथा पूरे नेटवर्क को खंगालने के बजाय प्रशासन सिर्फ विस्फोट से संबंधित लोगों पर एफआईआर कर ही अपनी जिम्मेवारी पूरी कर लेता है। डुमरांव के झगरू लोहार की गली में बुधवार को हुई घटना के अलावे आस पास के क्षेत्रों में कई बार अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट की घटना सामने आ चुकी है, जिसमें नया भोजपुर व पुराना भोजपुर में तो पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट में एक-एक व्यक्तियों की जान चली गई थी, जबकि उनका पूरा मकान ही ध्वस्त हो गया था।

अब जबकि डुमरांव में पटाखा निर्माण वाले घर में विस्फोट के बाद एक बार फिर से लोगों में पटाखा के अवैध निर्माण व भंडारण के खेल पर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि डुमरांव के कई रिहायशी इलाकों में वर्षों से अवैध तरीके से न सिर्फ पटाखा का निर्माण किया जाता है, बल्कि बड़े पैमाने पर भंडारण भी किया जाता है। ऐसे में कभी थोड़ी सी लापरवाही या निर्माण में अनियमितता से विस्फोट जैसी घटनाएं हो जाती है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन व पुलिस के पास इसकी सूची तक नहीं है कि कहां-कहां अवैध तरीके से पटाखे का निर्माण हो रहा है या फिर कौन-कौने लोग इससे जुड़े है। जिससे उनपर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। डुमरांव की घटना के बाद अब देखना है कि क्या प्रशासन इस बार अवैध तरीके से विस्फोटकों का कारोबार करने वालों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर इस बार भी मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित रह जाएगा।

-- बड़ा सवाल, पटाखा निर्माण के लिए कहा से मिलता है रा मेटेरियल
इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे है। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर अवैध तरीके से पटाखा निर्माण के लिए रा-मेटेरियल कैसे मिल जाता है, जबकि पटाखा निर्माण में उपयोग आने वाले शोरा तथा अन्य पदार्थ की बिक्री पर रोक है तथा इसके लिए लाइसेंस अनिवार्य है। लेकिन, जानकारों का कहना है कि शहर तथा आस पास के क्षेत्र में शोरा, गंधक, नौसादर जैसे पदार्थ आसानी से मिल जाते है, जिस कारण अवैध कारोबार करने वालों का कारोबार फल-फूल रहा है। पिछले दिनों डुमरांव के एक दुकान पर हुई छापेमारी में बड़े पैमाने पर पटाखा निर्माण के लिए काम आने वाले शोरा आदि बरामद हुआ था। जिससे यहा प्रमाणित हो रहा है कि पटाखा निर्माण का मेटेरियल शहर में आसानी से मिल जा रहा है।

