सरेंजा दंगल में दांव-पेंच का रोमांच, महिला पहलवानों ने भी बिखेरा जलवा
चैत्र पूर्णिमा सह महावीरी पूजा के अवसर पर प्रखंड के सरेंजा स्थित बजरंग मंदिर अखाड़े में गुरुवार को आयोजित विराट दंगल ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी दंगल में दूर-दराज से आए नामी पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच का प्रदर्शन कर माहौल को जोशीला बना दिया।

__ चैत्र पूर्णिमा पर आयोजित प्रतियोगिता में देशभर के नामी पहलवान शामिल, दिल्ली की पूनम ने शानदार जीत दर्ज कर जीता इनाम
केटी न्यूज/चौसा
चैत्र पूर्णिमा सह महावीरी पूजा के अवसर पर प्रखंड के सरेंजा स्थित बजरंग मंदिर अखाड़े में गुरुवार को आयोजित विराट दंगल ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी दंगल में दूर-दराज से आए नामी पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच का प्रदर्शन कर माहौल को जोशीला बना दिया।इस प्रतियोगिता में बिहार, दिल्ली, अयोध्या, वाराणसी, आजमगढ़, राजगीर, बलिया, गाजीपुर और मऊ समेत कई स्थानों के चर्चित पहलवानों ने भाग लिया। अखाड़े में एक से बढ़कर एक मुकाबले देखने को मिले। कई कुश्तियां इतनी कड़ी रहीं कि निर्णायक फैसला नहीं हो सका और मुकाबले बराबरी पर छूट गए।

वहीं कुछ मुकाबलों में युवा पहलवानों ने अनुभवी खिलाड़ियों को चौंकाते हुए मिनटों में शिकस्त दे दी, जिससे दर्शक तालियों से गूंज उठे।इस बार दंगल का सबसे खास आकर्षण महिला कुश्ती रही, जिसने लोगों का खास ध्यान खींचा। महिला पहलवानों ने भी अपनी ताकत और तकनीक का शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं। दिल्ली की पूनम ने आगरा की अंशु पहलवान के साथ हुए मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। इस मुकाबले के लिए पांच हजार रुपये का इनाम निर्धारित था, जिसे जीतकर पूनम ने दर्शकों का दिल जीत लिया।इसके अलावा राजगीर, बक्सर और आसपास के क्षेत्रों से आई महिला पहलवानों ने भी अपने हुनर का दमदार प्रदर्शन किया।

दर्शकों ने महिला मुकाबलों का भरपूर आनंद लिया और उनका उत्साह बढ़ाया।दंगल में निर्णायक की भूमिका देवराज सिंह यादव ने निभाई, जबकि उद्घोषक के रूप में नसीम पहलवान ने पूरे कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्य अशोक यादव, संजय यादव, राकेश कुमार, मुन्ना यादव, चुनमुन यादव और रामनिवास यादव सहित कई लोगों का सक्रिय योगदान रहा।पूरे दिन चले इस आयोजन में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। पारंपरिक कुश्ती के इस आयोजन ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि ग्रामीण खेल संस्कृति को भी मजबूती देने का काम किया।

