पुराना भोजपुर में जाम से ढाई घंटे ठप रहा परिचालन, एम्बुलेंस और स्कूली बच्चे फंसे, पुलिस नदारद

डुमरांव के पुराना भोजपुर चौक पर सोमवार दोपहर जो तस्वीर उभरकर सामने आई, उसने शहर की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। लग्न का मौसम था, भीड़ तय थी, ट्रैफिक दबाव अनुमानित था, फिर भी शहर प्रशासन ने मानो आंखों पर पट्टी बांधकर दिन गुजारने की ठान ली थी। दोपहर ठीक 12 बजे पूरे इलाके में ऐसा जाम लगा कि वाहनों की रफ्तार ढाई घंटे तक थम गई। सड़कें वाहनों से पटी रहीं, लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे और प्रशासन कहीं दूर आराम फरमाता हुआ नजर आया।

पुराना भोजपुर में जाम से ढाई घंटे ठप रहा परिचालन, एम्बुलेंस और स्कूली बच्चे फंसे, पुलिस नदारद

-- पिछले कुछ दिनों से पुराना भोजपुर चौक से बाजार तक जाम के कारण ठहर जा रही है वाहनों की रफ्तार, बढ़ा आक्रोश

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव के पुराना भोजपुर चौक पर सोमवार दोपहर जो तस्वीर उभरकर सामने आई, उसने शहर की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। लग्न का मौसम था, भीड़ तय थी, ट्रैफिक दबाव अनुमानित था, फिर भी शहर प्रशासन ने मानो आंखों पर पट्टी बांधकर दिन गुजारने की ठान ली थी। दोपहर ठीक 12 बजे पूरे इलाके में ऐसा जाम लगा कि वाहनों की रफ्तार ढाई घंटे तक थम गई। सड़कें वाहनों से पटी रहीं, लोग घंटों सड़क पर फंसे रहे और प्रशासन कहीं दूर आराम फरमाता हुआ नजर आया।

-- स्कूली वाहनों में बंद बच्चे, भूख-प्यास से परेशान

इस जाम की सबसे दर्दनाक तस्वीर स्कूली बच्चों की थी। दर्जनों स्कूल वैन और ऑटो उसी जाम के बीच घंटों अटके रहे। छोटे-छोटे बच्चे भूखे-प्यासे अधीर होकर धीरे-धीरे रोने लगे, लेकिन निकलने का कोई रास्ता नहीं था। अभिभावक लगातार फोन पर अपने बच्चों का हाल लेते रहे, मगर ड्राइवरों का जवाब एक ही कि जाम में फंसे हैं, हिल भी नहीं पा रहे।शहर में ट्रैफिक की ऐसी स्थिति पहले भी कई बार देखी गई है, लेकिन इस बार हालात नए स्तर पर शर्मनाक हो गए। स्कूलों की छुट्टी के बाद भूखे-प्यासे बच्चे घर जाने की जल्दबाजी में थे। इधर, महिलाएं तथा अन्य यात्री परेशान थे, बावजूद ट्रैफिक नियंत्रण के नाम पर शून्य व्यवस्था।

-- एम्बुलेंस भी थमी, डायल-112 खुद मुसीबत में

सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब एक एम्बुलेंस जाम में फंसकर घंटों वहीं पड़ी रही। मरीज की स्थिति क्या थी, वह पहुंचा या नहीं, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं। लेकिन यह साफ है कि  प्रशासन की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवा तक को ठप कर दिया।और तो और, डायल-112 की इमरजेंसी गाड़ी, जो आमतौर पर भीड़ हटाने में सबसे आगे रहती है, खुद जाम के बीच मदद की मोहताज बन गई थी। यह दृश्य प्रशासन की विफलता का जीवंत प्रमाण था।

-- नया भोजपुर पुलिस की धीमी चाल पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा आलोचना नया भोजपुर थाने की पुलिस की हो रही है। लोग बताते हैं कि जाम 12 बजे से लगा हुआ था, पर पुलिस तब पहुंची जब ढाई घंटे बीत चुके थे और लोग लगभग टूट चुके थे।जैसे ही पुलिस पहुंची, कुछ ही मिनटों में जाम खुल गया। यह देखकर लोग और भी आक्रोशित हो उठे। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंचती तो लोगों को इस भीषण जाम का सामना ही नहीं करना पड़ता। सवाल यही कि ढाई घंटे तक पुलिस की ड्यूटी आखिर रुकी कहां थी। क्या प्रशासन को लग्न के दिनों का ट्रैफिक बढ़ने का अंदाजा नहीं होता। क्या भीड़ प्रबंधन की कोई योजना पहले से नहीं बनाई गई थी। क्या क्षेत्र का ट्रैफिक सिस्टम सिर्फ किस्मत के भरोसे चलता है।

-- स्थानीय लोग खुद बने ‘ट्रैफिक कॉन्स्टेबल’

जाम में फंसे लोगों की मानें तो प्रशासन के इंतजार में खड़े रहना बेकार था। स्थानीय युवाओं ने खुद सड़क पर उतरकर वाहनों को निकलवाने की कोशिश की। कई जगहों पर लोगों ने हाथ देकर ट्रैफिक को डायरेक्ट किया, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि व्यवस्था टूटती चली गई।लोगों ने कहा कि जब भी पुराना भोजपुर चौक पर जाम लगता है, प्रशासन बाद में आता है और दावा करता है कि स्थिति नियंत्रण में है। परंतु असल तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। नियंत्रण देर से आता है, और नुकसान पहले हो जाता है।

-- लोगों की मांग, स्थायी समाधान हो

घटना के बाद आम लोगों में गुस्सा साफ झलक रहा है। भोजपुरवासी मांग कर रहे हैं कि प्रशासन सिर्फ ‘कागजी व्यवस्था’ पर न चले, बल्कि पुराने भोजपुर चौक के लिए स्थायी ट्रैफिक प्लान तैयार करे। लग्न, त्योहार और भीड़भाड़ के दिनों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती अनिवार्य की जाए।स्थानीय निवासी मुखिया सिंह कुशवाहा ने कहा कि बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। शहर में बार-बार लगने वाले जाम सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि प्रशासन की लगातार जारी लापरवाही का सबूत हैं।