बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में बिहार के गरीब मरीजों का नहीं हो पा रहा है इलाज, बक्सर सांसद ने उठाए सवाल
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में बिहार के आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इलाज व्यवस्था बाधित होने से सबसे ज्यादा असर गरीब, सड़क दुर्घटना पीड़ित और गंभीर रूप से घायल मरीजों पर पड़ा है, जिनके लिए यह ट्रॉमा सेंटर वर्षों से एक भरोसेमंद चिकित्सा केंद्र रहा है।
-- बोले सांसद लंबित भुगतान के कारण रुकी दवाओं की आपूर्ति, वाराणसी के प्रमुख ट्रॉमा सेंटर में आयुष्मान लाभार्थियों का इलाज प्रभावित
केटी न्यूज/बक्सर
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में बिहार के आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इलाज व्यवस्था बाधित होने से सबसे ज्यादा असर गरीब, सड़क दुर्घटना पीड़ित और गंभीर रूप से घायल मरीजों पर पड़ा है, जिनके लिए यह ट्रॉमा सेंटर वर्षों से एक भरोसेमंद चिकित्सा केंद्र रहा है।मामले को लेकर बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है।

सांसद का कहना है कि बिहार सरकार द्वारा बीएचयू ट्रॉमा सेंटर का भारी भुगतान लंबित रहने के कारण दवाओं की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे अस्पताल में नियमित इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इस विषय में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।सांसद के अनुसार, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज कराने वाले मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत मरीज बिहार से आते हैं। इनमें बक्सर सहित आसपास के जिलों के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। उत्तर प्रदेश स्थित यह संस्थान बिहार के सीमावर्ती जिलों के लिए गंभीर मामलों में सबसे नजदीकी और उन्नत चिकित्सा सुविधा माना जाता है।

ऐसे में यहां इलाज रुकना सीधे तौर पर मरीजों की जान को जोखिम में डालने जैसा है।बताया जा रहा है कि भुगतान में देरी के कारण दवा आपूर्तिकर्ता कंपनियों ने अस्पताल को जरूरी दवाएं देना बंद कर दिया है। इसका सीधा असर आपातकालीन सेवाओं और सर्जरी सहित अन्य इलाज प्रक्रियाओं पर पड़ा है। आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थागत खामियां इस उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही हैं।सांसद ने सरकार से मांग की है कि लंबित भुगतान तुरंत जारी कर इलाज व्यवस्था को सामान्य किया जाए।

साथ ही इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मरीजों के इलाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।यह मामला अब केवल भुगतान या प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हजारों गरीब परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर और व्यापक हो सकता है।
