फोरलेन पर बेलगाम रफ्तार का कहर, दो महीनों में 20 मौतें, प्रशासन बेफिक्र
जिले से होकर गुजरने वाली बक्सर-पटना फोरलेन सड़क इन दिनों रफ्तार और लापरवाही के कारण जानलेवा साबित हो रही है। बीते दो महीनों में इस मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटनाओं में करीब 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में अधिकांश बाइक सवार बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। लगातार हो रहे हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं और क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।
-- ओवरस्पीड, ट्रिपल राइडिंग और लेन अनुशासनहीनता से बढ़ीं दुर्घटनाएं, प्रशासन सख्ती का दावा, लोग ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े
केटी न्यूज/डुमरांव
जिले से होकर गुजरने वाली बक्सर-पटना फोरलेन सड़क इन दिनों रफ्तार और लापरवाही के कारण जानलेवा साबित हो रही है। बीते दो महीनों में इस मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटनाओं में करीब 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतकों में अधिकांश बाइक सवार बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। लगातार हो रहे हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं और क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन पर निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं हो रहा। स्पीड कंट्रोल के लिए न तो नियमित जांच दिखती है और न ही ओवरस्पीड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई। नतीजतन चालक बेखौफ होकर तेज रफ्तार में वाहन चला रहे हैं।

खासकर दोपहिया वाहन चालकों में नियमों की अनदेखी आम हो गई है। बिना हेलमेट बाइक चलाना, एक बाइक पर तीन लोगों का बैठना और चलते वाहन पर मोबाइल का इस्तेमाल करना आम दृश्य बन चुका है।परिवहन विभाग के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अधिकांश दुर्घटनाओं की जड़ तेज रफ्तार है। अनियंत्रित गति के कारण वाहन संतुलन खो बैठते हैं और छोटी सी चूक बड़े हादसे का रूप ले लेती है। मोटर वाहन अधिनियम में ओवरस्पीड पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन तक का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित दिखाई देता है।हादसों के बाद कई बार स्थानीय लोग आक्रोशित होकर सड़क जाम कर देते हैं। इससे घंटों आवागमन ठप रहता है और दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

जाम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है।समाजसेवी कृष्णा शर्मा का कहना है कि दुर्घटनाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की होती है। यदि गोल्डन ऑवर में इलाज मिल जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि फोरलेन पर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, स्पीड गन से जांच की जाए और सघन चालान अभियान चलाया जाए।एक अन्य गंभीर समस्या लेन अनुशासन की है। कई स्थानों पर भारी वाहन अचानक लेन बदल देते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहन चालक असंतुलित हो जाते हैं। गलत दिशा में वाहन चलाना और बिना संकेत दिए कट लेना भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेन अनुशासन और गति सीमा का सख्ती से पालन कराया जाए तो हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।यातायात नियमों की जानकारी और जागरूकता की कमी भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नाबालिगों द्वारा बाइक चलाना आम बात है। कई बार इनके पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता। अभिभावकों की लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

डुमरांव के एसडीपीओ पोलस्त कुमार का कहना है कि विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं और हेलमेट जांच के लिए विशेष अभियान भी संचालित किए जाते हैं। नाबालिग चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, लगातार हो रहे हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि केवल अभियान पर्याप्त नहीं, बल्कि सतत निगरानी और कठोर प्रवर्तन की आवश्यकता है।फिलहाल, फोरलेन पर बढ़ते हादसे प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो रफ्तार का यह खेल और कई जिंदगियां निगल सकता है।
