शहरी बिल, ग्रामीण सप्लाई: चौसा नगर पंचायत में बिजली व्यवस्था पर फूटा गुस्सा
चौसा नगर पंचायत क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद कई वार्डों में उपभोक्ताओं को ग्रामीण इलाकों जैसी बिजली सप्लाई मिल रही है, जबकि उनसे बिल शहरी दर के अनुसार वसूला जा रहा है। इस दोहरी व्यवस्था ने स्थानीय लोगों की परेशानी और नाराजगी दोनों को बढ़ा दिया है।

__ 12–14 घंटे ही मिल रही बिजली, फिर भी वसूली शहरी दर से; वार्ड पार्षदों ने भी मानी समस्या
केटी न्यूज/चौसा
चौसा नगर पंचायत क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद कई वार्डों में उपभोक्ताओं को ग्रामीण इलाकों जैसी बिजली सप्लाई मिल रही है, जबकि उनसे बिल शहरी दर के अनुसार वसूला जा रहा है। इस दोहरी व्यवस्था ने स्थानीय लोगों की परेशानी और नाराजगी दोनों को बढ़ा दिया है।नगर पंचायत के वार्ड संख्या 14 (न्यायीपुर दलित बस्ती), वार्ड 11 (कनक नारायणपुर), 12 (नंदुपुर) और 13 (अखौरीपुर गोला) के निवासियों का कहना है कि उन्हें नियमित और पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही।

आरोप है कि एक-एक घंटे की आपूर्ति के बाद कटौती कर दी जाती है, जिससे पूरे दिन में महज 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल पाती है।इसके बावजूद विभाग द्वारा शहरी उपभोक्ताओं की दर से बिल वसूला जा रहा है, जो उनके लिए आर्थिक बोझ बन चुका है।स्थानीय निवासियों—शेषनाथ सिंह, संजय सिंह, शशिनाथ सिंह, राजेंद्र राम, छट्ठूलाल पासवान, छोटेलाल चौधरी और महादेव राम आदि ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि हर बार शिकायत को टाल दिया जाता है या उच्च स्तर पर भेजने की बात कहकर मामले को लंबित रखा जाता है।

इस समस्या की पुष्टि करते हुए वार्ड पार्षद अंजू कुमारी और रामबाबू ने भी माना कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि जब कनीय अभियंता से इस विषय में बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले को मंत्री स्तर तक भेजने की बात कहकर किनारा कर लिया।ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि या तो उन्हें शहरी क्षेत्र के अनुरूप 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जाए, या फिर बिलिंग ग्रामीण दर पर की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर है।

