पांच दुर्लभ योगों में आएगा वट सावित्री व्रत, सुहागिनों में उत्साह चरम पर
सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु से जुड़ा वट सावित्री व्रत इस बार विशेष धार्मिक संयोगों के कारण और अधिक फलदायी माना जा रहा है। 16 मई, शनिवार को पड़ने वाले इस व्रत में एक साथ पांच शुभ योग बनने से श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुट गई हैं और बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है।


__ शनि जयंती और सौभाग्य योग के संयोग से बढ़ा धार्मिक महत्व, बाजारों में पूजन सामग्री की बढ़ी मांग
केटी न्यूज/डुमरांव
सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु से जुड़ा वट सावित्री व्रत इस बार विशेष धार्मिक संयोगों के कारण और अधिक फलदायी माना जा रहा है। 16 मई, शनिवार को पड़ने वाले इस व्रत में एक साथ पांच शुभ योग बनने से श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक महिलाएं व्रत की तैयारियों में जुट गई हैं और बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर दर्श अमावस्या, शनि जयंती, शनि अमावस्या, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसे दांपत्य सुख, परिवार की समृद्धि और संकट निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।

आचार्य पं. विंध्याचल ओझा ने बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व पहले से ही विशेष होता है, लेकिन इस बार एक साथ कई शुभ योग बनने से व्रत का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाएगा।उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई की सुबह से होगी और पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 4:58 बजे से पूरे दिन रहेगा। इस दौरान वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करना विशेष लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।

तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।व्रत के दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर पारंपरिक वेशभूषा और सोलह श्रृंगार में वट वृक्ष की पूजा करेंगी। पूजा में सप्तधान्य, धूप, दीप, फल, मिठाई और भीगे चने का विशेष महत्व बताया गया है। महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर 7 या 108 बार परिक्रमा करेंगी और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनेंगी।इधर, व्रत को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। मिट्टी के बर्तन, बांस के पंखे, पूजा सामग्री और श्रृंगार प्रसाधनों की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थित वट वृक्षों के आसपास साफ-सफाई और अन्य तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

