दुष्कर्म के आरोपित शिक्षक वीरेंद्र का विवादों से पुराना नाता, फर्जी बीएड पर भी उठ चुके हैं गंभीर सवाल

कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के नथुनी अहीर के डेरा स्थित सरकारी मध्य विद्यालय में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप में फरार चल रहे शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद का विवादों से पुराना नाता रहा है। छात्रा के साथ कथित कुकर्म का गंभीर आरोप सामने आने के बाद अब उनके पुराने विवाद और शिक्षक पद पर नियुक्ति से जुड़े प्रमाणपत्र की जांच का मामला भी फिर चर्चा में आ गया है।

दुष्कर्म के आरोपित शिक्षक वीरेंद्र का विवादों से पुराना नाता, फर्जी बीएड पर भी उठ चुके हैं गंभीर सवाल

__ लोक शिकायत की जांच में 1997-99 सत्र में नामांकन नहीं मिलने का दावा, पुष्टि के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से  शिक्षा विभाग की भूमिका कटघरे में

केटी न्यूज/बक्सर।

कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के नथुनी अहीर के डेरा स्थित सरकारी मध्य विद्यालय में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप में फरार चल रहे शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद का विवादों से पुराना नाता रहा है। छात्रा के साथ कथित कुकर्म का गंभीर आरोप सामने आने के बाद अब उनके पुराने विवाद और शिक्षक पद पर नियुक्ति से जुड़े प्रमाणपत्र की जांच का मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि पूर्व में लोक शिकायत के निर्देश पर हुई जांच में उनके बीएड प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आने का दावा किया गया था, बावजूद इसके तत्कालीन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

__ कठार मध्य विद्यालय में विवाद के बाद हुआ था तबादला

सूत्रों के अनुसार, वीरेंद्र प्रसाद की पूर्व में कठार मध्य विद्यालय में पोस्टिंग थी। वहां भी वे आपसी विवाद को लेकर चर्चा में आए थे। विवाद बढ़ने के बाद विभागीय स्तर पर उनका तबादला कर दिया गया था। इसके बाद वे दूसरे विद्यालय में पदस्थापित हुए। अब दुष्कर्म के गंभीर आरोप में नाम सामने आने के बाद उनके पुराने विवादों की भी चर्चा शुरू हो गई है।

__ लोक शिकायत में पहुंचा था फर्जी प्रमाणपत्र का मामला

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में शिकायतकर्ता शत्रुघ्न सिंह ने जिला लोक शिकायत पदाधिकारी के यहां आवेदन देकर वीरेंद्र प्रसाद पर कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक की नौकरी करने का आरोप लगाया था। मामले की जांच तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिल द्विवेदी के निर्देश पर तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अजय प्रसाद के माध्यम से कराई गई थी।जांच के क्रम में अधिकारी बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय भी पहुंचे थे, जो पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध बताया गया। सूत्रों का दावा है कि वहां वर्ष 1997-99 के बीएड सत्र से संबंधित अभिलेखों की जांच में वीरेंद्र प्रसाद का नामांकन नहीं मिला था। इस आधार पर उनके द्वारा प्रस्तुत बीएड प्रमाणपत्र की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

__  पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं, अब उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभागीय जांच में प्रमाणपत्र से संबंधित गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी, तो इसके बाद भी वीरेंद्र प्रसाद पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आरोप है कि मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया और संबंधित फाइल पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। इससे तत्कालीन शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों का यह भी दावा है कि कथित ‘मैनेजमेंट’ और कुछ प्रभावशाली लोगों से नजदीकी के कारण मामला दबा दिया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

__ गिरफ्तारी और गहन पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज

जानकारों का कहना है कि यदि वीरेंद्र प्रसाद गिरफ्तार होते हैं और पुलिस पूरे मामले में गहराई से पूछताछ करती है, तो उनके कार्यकाल से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए। इससे न केवल छात्राओं से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है, बल्कि शिक्षक नियुक्ति में कथित प्रमाणपत्र फर्जीवाड़े और विभागीय स्तर पर हुई लापरवाही की परतें भी खुल सकती हैं। ऐसे में पुराने जांच अभिलेखों को दोबारा खंगालना शिक्षा विभाग के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।