आखिर क्यों नहीं छोड़ रहा है स्थापना डीपीओ विष्णुकांत राय का बक्सर मोह क्या बोले डीईओ ..........

बक्सर शिक्षा विभाग के खेल निराले है। एक तरफ कई पूर्व डीपीओ या डीईओ बहुत कम समय में ही बक्सर से अपना तबादला करा लिए तो दूसरी तरफ वर्तमान स्थापना डीपीओ विष्णुकांत राय का बक्सर मोह कुछ ऐसा है कि तबादले के बाद भी वे यहां से जाने को तैयार नहीं है। जिससे कई सवाल खड़े हो रहे है।

आखिर क्यों नहीं छोड़ रहा है स्थापना डीपीओ विष्णुकांत राय का बक्सर मोह क्या बोले डीईओ ..........

--  तबादले के बाद आखिर क्यों नहीं कर रहे है नये स्थल पर योगदान

-- 31 जुलाई को ही हो गया था फर्स्ट आइडिया को 40 लाख का भुगतान, 14 अगस्त को किया गया अन्य एजेंसियों को भुगतान

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर शिक्षा विभाग के खेल निराले है। एक तरफ कई पूर्व डीपीओ या डीईओ बहुत कम समय में ही बक्सर से अपना तबादला करा लिए तो दूसरी तरफ वर्तमान स्थापना डीपीओ विष्णुकांत राय का बक्सर मोह कुछ ऐसा है कि तबादले के बाद भी वे यहां से जाने को तैयार नहीं है। जिससे कई सवाल खड़े हो रहे है। बता दें कि हाल के दिनों में बक्सर का शिक्षा विभाग जिन तथाकथित माफियाओं तथा उनके संरक्षण में चलने वाली एजेंसियों केे भुगतान को लेकर चर्चा में रहा है, उनमें सीधे तौर पर स्थापना डीपीओ की भूमिका सामने आई है। यहीं कारण है कि तबादले के बावजूद उनके यहां जमे रहने पर सवाल खड़े हो रहा है।

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि तथाकथित माफियाओं के संरक्षण में चल रही हाउस कीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया हो या फिर अजय सिंह की शिक्षिका पत्नी शोभा देवी के निलंबन टूटते ही समस्त बकाए का भुगतान का मामला स्थापना डीपीओ ने भुगतान करने में काफी तत्परता दिखाई है। जबकि इसके उलट अन्य एजेंसियों या शिक्षकों के मामले में ऐसा नहीं देखा जा रहा है। जिससे शिक्षा माफियाओं के साथ इनके तालमेल से इंकार नहीं किया जा सकता है।बता दें कि विभागीय जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि हाउस कीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया का चयन मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था तथा पूर्व से कार्यरत एजेंसी को बिना किसी ठोस कारण के हटाकर उसके जगह फर्स्ट आइडिया को वर्क ऑर्डर दिया गया था।

यहीं नहीं बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बाद इस मामले की जांच उप समाहर्ता ( विभागीय जांच ) गिरिजेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटि कर रही थी, इस बीच स्थापना डीपीओ ने अन्य एजेंसियों को छोड़ सबसे पहले 31 जुलाई को ही फर्स्ट आइडिया को 40 लाख रूपए का भुगतान कर दिया गया। यहीं, नहीं बल्कि 13 अगस्त को भी 12 लाख का भुगतान इस एजेंसी को किया गया, जबकि अन्य एजेंसियों को यह भुगतान 14 अगस्त को किया गया। यहां सवाल उठता है कि जांच पूरी होने के पहले भुगतान में क्यों जल्दबाजी की गई तथा जिस एजेंसी के चयन पर ही सवाल था उसे पहले क्यों पैसा दिया गया। 

वहीं, विभागीय सूत्रों का कहना है कि अभी अनुकंपा पर बहाली तथा शिक्षकों के प्रोन्नति का मामला विभाग में चल रहा है, जिसमें मैनेज के खेल से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में कयाश लगाया जा रहा है कि मैनेज के खेल में माहिर स्थापना डीपीओ कही जानबूझकर तो बक्सर में अपना पांव नहीं जमाए है।इसके अलावे विभागीय जानकारों का यह भी कहना है कि हाउस कीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया को भुगतान सहित कई ऐसे मामले भी जिनकी यदि निष्पक्षता से जांच की जाए तो स्थापना डीपीओ की कलई खुल सकती है। गौरतलब हो कि छह अगस्त को ही शिक्षा विभाग द्वारा कई डीपीओ का स्थानांतरण किया गया था। इस दौरान बक्सर के स्थापना डीपीओ का तबादला कैमूर जिला में किया गया है। बावजूद वे अभी तक कैमूर में योगदान नहीं किये हैं। जबकि विभाग द्वारा अविलंब सभी पदाधिकारियों को नये जगह पर योगदान करने का निर्देश दिया गया था। 

इस मामले में बक्सर डीईओ संदीप रंजन ने बताया कि विभाग में अनुकंपा की बहाली की प्रक्रिया चल रही है। बहाली प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थापना डीपीओ को यहां से विरमित किया जाएगा।