कठिन सर्जरी से युवक के जबड़े में प्रत्यारोपित किए दांत, युवा दंत सर्जन डॉ. हिमांशु पांडेय की बड़ी सफलता

डुमरांव के युवा दंत चिकित्सक एवं कुशल सर्जन तथा डुमरांव स्टेशन रोड स्थित पाल कटरा में दंत अस्पताल का संचालन करने वाले डॉ. हिमांशु पांडेय ने एक जटिल दंत सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मेडिकल साइंस, विशेष रूप से दंत चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सिमरी प्रखंड के दुबौली गांव निवासी 23 वर्षीय युवक विशाल दुबे के जबड़े में दांत प्रत्यारोपित कर उसे नई मुस्कान और आत्मविश्वास प्रदान किया है।

कठिन सर्जरी से युवक के जबड़े में प्रत्यारोपित किए दांत, युवा दंत सर्जन डॉ. हिमांशु पांडेय की बड़ी सफलता

__ जन्म से ही दांतों की कमी से जूझ रहे युवक को मिला नया जीवन, आधुनिक डेंटल इंप्लांट तकनीक से मुस्कान लौटी

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव के युवा दंत चिकित्सक एवं कुशल सर्जन तथा डुमरांव स्टेशन रोड स्थित पाल कटरा में दंत अस्पताल का संचालन करने वाले डॉ. हिमांशु पांडेय ने एक जटिल दंत सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मेडिकल साइंस, विशेष रूप से दंत चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सिमरी प्रखंड के दुबौली गांव निवासी 23 वर्षीय युवक विशाल दुबे के जबड़े में दांत प्रत्यारोपित कर उसे नई मुस्कान और आत्मविश्वास प्रदान किया है।विशाल दुबे एक दुर्लभ दंत समस्या से पीड़ित था। जन्म से ही उसके मुंह में बहुत कम दांत थे।

सामान्य व्यक्ति के मुंह में जहां 28 से 32 दांत होते हैं, वहीं विशाल के ऊपरी जबड़े में मात्र चार और निचले जबड़े में केवल दो दांत ही मौजूद थे।दांतों की इस कमी के कारण उसे खाने-पीने, बोलने और सामाजिक जीवन में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।इस जटिल स्थिति को देखते हुए डॉ. हिमांशु पांडेय ने आधुनिक दंत चिकित्सा तकनीक का सहारा लेते हुए विस्तृत जांच और योजना बनाई। उन्होंने बताया कि पहले युवक के पूरे जबड़े का परीक्षण किया गया और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई।

डॉ. हिमांशु के अनुसार ऊपरी जबड़े में मौजूद प्राकृतिक दांतों को आधार बनाकर फिक्स्ड डेंटल प्रोस्थेसिस लगाया गया, जिससे ऊपर के हिस्से में स्थायी दांतों का सेट तैयार किया गया। वहीं निचले जबड़े में दांतों की लगभग पूर्ण अनुपस्थिति होने के कारण आधुनिक डेंटल इंप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया में जबड़े की हड्डी के भीतर विशेष टाइटेनियम इंप्लांट लगाए गए, जिन पर कृत्रिम दांतों को स्थायी रूप से स्थापित किया गया।उन्होंने बताया कि यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि जन्म से दांतों की कमी होने पर जबड़े की हड्डी का विकास भी सामान्य से अलग होता है।

ऐसे में इंप्लांट लगाने के लिए बेहद सावधानी और सटीक तकनीक की आवश्यकता होती है। कई चरणों में की गई इस सर्जरी के सफल होने से डॉक्टरों की टीम का उत्साह भी बढ़ा है।सर्जरी के बाद अब विशाल दुबे सामान्य रूप से खाना खा पा रहा है और उसकी मुस्कान भी लौट आई है। लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिलने पर विशाल और उसके परिवार के सदस्यों ने डॉ. हिमांशु पांडेय के प्रति आभार व्यक्त किया है।विशेषज्ञों के अनुसार दंत चिकित्सा में इंप्लांट तकनीक आधुनिक मेडिकल साइंस की बड़ी उपलब्धि है, जिससे ऐसे मरीजों को भी सामान्य जीवन मिल सकता है जिनके दांत किसी कारणवश नहीं होते। डुमरांव जैसे क्षेत्र में इस प्रकार की जटिल सर्जरी का सफल होना स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।