बक्सर के छोटकी सारिमपुर घाट पर दशकर्म में शामिल होने आया परिवार उजड़ा, एक किशोर की मौत, दूसरा लापता

बक्सर के छोटकी सारिमपुर गंगा घाट पर शुक्रवार को लापरवाही, अव्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की पोल उस वक्त खुल गई, जब दशकर्म में शामिल होने आया एक परिवार देखते ही देखते मातम में डूब गया। गंगा स्नान के दौरान तीन किशोर अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए।

बक्सर के छोटकी सारिमपुर घाट पर दशकर्म में शामिल होने आया परिवार उजड़ा, एक किशोर की मौत, दूसरा लापता

__  घाट पर सुरक्षा इंतजाम नदारद, गहराई और तेज बहाव ने निगले दो बच्चे, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर के छोटकी सारिमपुर गंगा घाट पर शुक्रवार को लापरवाही, अव्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की पोल उस वक्त खुल गई, जब दशकर्म में शामिल होने आया एक परिवार देखते ही देखते मातम में डूब गया। गंगा स्नान के दौरान तीन किशोर अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। एक बच्चे को स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने किसी तरह बचा लिया, जबकि एक किशोर की मौत हो गई और दूसरा देर शाम तक लापता रहा।यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि गंगा घाटों पर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा आईना बनकर सामने आया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घाट पर न तो कोई चेतावनी बोर्ड था, न बैरिकेडिंग और न ही सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती।

जानकारी के मुताबिक अहिरौली निवासी मनोज कुमार सिंह अपने पिता के दशकर्म के सिलसिले में परिजनों के साथ छोटकी सारिमपुर पुलिया घाट पहुंचे थे। मुंडन संस्कार के बाद परिवार के लोग गंगा स्नान कर रहे थे। इसी दौरान बच्चे भी नदी में उतर गए। कुछ ही देर में घाट के समीप मौजूद गहरे गड्ढे और तेज बहाव ने तीनों किशोरों को अपनी चपेट में ले लिया।घटना के बाद घाट पर चीख-पुकार मच गई। मौके पर मौजूद लोगों ने जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाई। काफी मशक्कत के बाद भदार निवासी अनिल सिंह के 12 वर्षीय पुत्र रतन सिंह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

हालांकि तब तक मनोज सिंह के सात वर्षीय पुत्र मुकुंद सिंह और उनके बहनोई संजीव सिंह के 13 वर्षीय पुत्र छोटू कुमार पानी में समा चुके थे।सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे। घंटों चले खोज अभियान के बाद देर शाम छोटू कुमार का शव बरामद कर लिया गया, जबकि मुकुंद सिंह की तलाश खबर लिखे जाने तक जारी थी।सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल गंगा घाटों पर स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान हादसे होते हैं, बावजूद इसके सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति क्यों होती है? स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को पहले से पता था कि घाट पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे, फिर भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया।

लोगों का कहना है कि घाट के खतरनाक हिस्सों को चिन्हित कर बैरिकेडिंग की जानी चाहिए थी। यदि मौके पर गोताखोरों और एसडीआरएफ की पहले से तैनाती होती, तो शायद दो मासूमों की जिंदगी बचाई जा सकती थी।घटना के बाद घाट पर मातमी सन्नाटा पसरा रहा। रोते-बिलखते परिजनों की चीखें माहौल को झकझोरती रहीं। प्रशासन की ओर से एसडीआरएफ टीम को बुलाने की बात कही गई, लेकिन देर शाम तक टीम के मौके पर नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी भी दिखी।यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि बक्सर के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे है। अगर प्रशासन ने समय रहते इंतजाम नहीं किए, तो ऐसे हादसे आगे भी कई परिवारों की खुशियां निगलते रहेंगे।