कृष्णाब्रह्म के कारोबारी के नाम दर्ज क्रेटा से एमपी में डोडा-पोस्त की बड़ी खेप बरामद
मध्यप्रदेश के रतनगढ़ में मादक पदार्थ की बड़ी खेप के साथ पकड़ी गई क्रेटा कार का कनेक्शन कृष्णाब्रह्म बाजार से जुड़ने के बाद इस मामले की जांच का दायरा बिहार तक पहुंच गया है। पुलिस के अनुसार, उक्त क्रेटा कार कृष्णाब्रह्म बाजार के एक स्थानीय व्यवसायी के नाम पर पंजीकृत है।

__ रतनगढ़ में एक जुलाई को पकड़ा गया था वाहन, एनडीपीएस एक्ट में प्राथमिकी; स्थानीय कारोबारी से पूछताछ के बाद तस्करी के नेटवर्क पर उठे सवाल
केटी न्यूज/कृष्णाब्रह्म।
मध्यप्रदेश के रतनगढ़ में मादक पदार्थ की बड़ी खेप के साथ पकड़ी गई क्रेटा कार का कनेक्शन कृष्णाब्रह्म बाजार से जुड़ने के बाद इस मामले की जांच का दायरा बिहार तक पहुंच गया है। पुलिस के अनुसार, उक्त क्रेटा कार कृष्णाब्रह्म बाजार के एक स्थानीय व्यवसायी के नाम पर पंजीकृत है। एक जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश में पकड़े गए इस वाहन से करीब 203 क्विंटल डोडा-पोस्त बरामद होने के बाद एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब पुलिस वाहन के स्वामित्व, उसके इस्तेमाल और मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।मध्यप्रदेश के रतनगढ़ थाना के सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल सोलंकी के अनुसार, एक जुलाई को वाहन को जांच के दौरान पकड़ा गया था। तलाशी में भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने के बाद कार्रवाई की गई।

पुलिस का फोकस अब इस बात पर है कि इतनी बड़ी खेप कहां से लाई गई थी, इसे राजस्थान में किसके पास पहुंचाया जाना था और तस्करी में इस्तेमाल वाहन किसके कब्जे या निर्देश पर था।जांच के क्रम में वाहन का पंजीकरण कृष्णाब्रह्म बाजार के एक व्यवसायी के नाम सामने आने के बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने स्थानीय स्तर पर भी सत्यापन शुरू किया है। कृष्णाब्रह्म प्रभारी थानाध्यक्ष सुनील कुमार साह गोंड़ ने बताया कि शुक्रवार को मध्यप्रदेश पुलिस ने क्रेटा के मालिक से पूछताछ की है और मामले की जांच जारी है।

__पहले से तस्करी को लेकर बदनाम रहा है इलाका
क्रेटा से मध्यप्रदेश में मादक पदार्थ की इतनी बड़ी खेप बरामद होने के बाद कृष्णाब्रह्म इलाके को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह क्षेत्र पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर पुलिस की कार्रवाई के केंद्र में रहा है। इलाके से कई बार मादक पदार्थों की खेप बरामद होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय निवासी व्यवसायी के नाम दर्ज वाहन से दूसरे राज्य में मादक पदार्थ की इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।हालांकि, केवल वाहन किसी व्यवसायी के नाम पंजीकृत होने से उनकी तस्करी में संलिप्तता साबित नहीं होती।

पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वाहन का इस्तेमाल किसने किया, वह तस्करों तक कैसे पहुंचा और वाहन मालिक की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं। पुलिस अब इन सभी बिंदुओं को जोड़कर तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।इतनी बड़ी बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि डोडा-पोस्त की खेप का स्रोत क्या था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। मध्यप्रदेश पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

