शिक्षक अविनाश त्रिपाठी के निधन से डुमरांव में पसरा मातमी सन्नाटा, हर आंख हुई नम
किसी परिवार के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी कि जिस बेटे से घर-आंगन की रौनक हो, जिसकी मौजूदगी से अपनों को हौसला मिलता हो, वही अचानक हमेशा के लिए साथ छोड़ जाए। डुमरांव नगर में शनिवार को कुछ ऐसा ही गमगीन माहौल देखने को मिला, जब शिक्षक अविनाश कुमार त्रिपाठी उर्फ चिंटू के आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया।

__ नई दिल्ली में इलाज के दौरान ली अंतिम सांस, शहर ने खोया एक होनहार शिक्षक और समाजसेवी परिवार का चिराग; अंतिम दर्शन के लिए आवास पर उमड़ी लोगों की भीड़
केटी न्यूज/डुमरांव।
किसी परिवार के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी कि जिस बेटे से घर-आंगन की रौनक हो, जिसकी मौजूदगी से अपनों को हौसला मिलता हो, वही अचानक हमेशा के लिए साथ छोड़ जाए। डुमरांव नगर में शनिवार को कुछ ऐसा ही गमगीन माहौल देखने को मिला, जब शिक्षक अविनाश कुमार त्रिपाठी उर्फ चिंटू के आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। नई दिल्ली में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही ठठेरी बाजार से लेकर नगर के विभिन्न इलाकों तक शोक की लहर फैल गई। हंसते-खेलते और अपनों के बीच अपनी पहचान रखने वाले चिंटू के असमय चले जाने की खबर से हर कोई मर्माहत नजर आया।

उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए ठठेरी बाजार स्थित तिवारी टोला के आवास पर स्थानीय नागरिकों, शुभचिंतकों और परिचितों का तांता लग गया। हर कोई नम आंखों से अपने प्रिय चिंटू को अंतिम विदाई देने पहुंच रहा था। घर पर जुटी भीड़ और परिजनों का करुण क्रंदन माहौल को और भी भावुक बना रहा था। अचानक आई इस दुखद खबर को लोग सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।अविनाश कुमार त्रिपाठी का संबंध डुमरांव के एक प्रतिष्ठित सामाजिक और राजनीतिक परिवार से था। वे महान स्वतंत्रता सेनानी कुमारी बाबा के परपौत्र थे। उनके दादा समाजसेवी राज रंजन त्रिपाठी उर्फ गोपालजी तिवारी टीटीई थे, जबकि पिता अमरेश चंद्र त्रिपाठी नगर के चर्चित समाजसेवी और कांग्रेस नेता हैं। ऐसे परिवार से जुड़े चिंटू ने शिक्षक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

वे बक्सर जिले के चौसा प्रखंड अंतर्गत तिवाय स्थित माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ी उनकी पहचान उन्हें लोगों के बीच सम्मान दिलाती थी।चार भाइयों में तीसरे स्थान पर रहे अविनाश अपने माता-पिता के लाडले थे। उनके बड़े भाई आशुतोष कुमार त्रिपाठी कांग्रेस के सक्रिय युवा संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है।उनके निधन से न सिर्फ परिवार, बल्कि डुमरांव ने भी एक शिक्षक और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित परिवार के युवा सदस्य को खो दिया है। पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बक्सर स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा।


